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Monday, December 20, 2010

तीसरे मोर्चे से घबराया हुआ था अमेरिका

 वेबसाइट विकिलीक्स ने भारत और अमेरिकी संबंधों के बारे में एक और अहम खुलासा किया है। वेबसाइट के मुताबिक साल 2009 के लोकसभा चुनावों के पहले अमेरिका भारत में वाम दलों के सत्ता में आने की संभावना से चिंतित था। इन चुनावों में वाम दल अहम भूमिका निभा रहे थे।
उस साल 12 फरवरी को भारत स्थित अमेरिकी दूतावास ने कहा कि एक तरफ जहां, कांग्रेस और भाजपा अपने दम पर सत्ता में नहीं आएंगे, वहीं अमेरिका-भारत के लिए सबसे बुरा पहलू तीसरे मोर्चे की सरकार बनने की स्थिति में हो सकता है। विकिलीक्स की ओर से जारी दूतावास के एक संदेश में कहा गया है कि उन परिस्थितियों में, कम्युनिस्ट पार्टियों का गठबंधन में खासा प्रभाव रहेगा। भारत में अप्रैल-मई में लोकसभा चुनाव हुए थे।
तत्कालीन राजदूत डेविड सी मलफोर्ड द्वारा हस्ताक्षर किए इस संदेश में इस बात पर भी जोर दिया गया है कि भाजपा और कांग्रेस दोनों नजदीकी अमेरिका-भारत संबंधों का समर्थन करती हैं। यह संदेश तत्कालीन अमेरिकी विशेष दूत रिचर्ड हॉलब्रुक के लिए था।
एजेंसी
इसमें कहा गया है कि अगर इन दोनों पार्टियों को सरकार बनाने के लिए स्थानीय दलों के साथ गठबंधन करना पड़ा तो अमेरिका-भारत संबंधों के आगे बढ़ने की क्षमता प्रभावित होगी।
इनसेट
भारत से जुड़े विकिलीक्स के अहम खुलासे
-अमेरिकी राजदूत टिमोथी रोमर से राहुल गांधी की इस बातचीत का खुलासा कि देश को ज्यादा खतरा हिंदू कट्टरपंथी संगठनों से है।
- चीन चाहता है कि पाकिस्तान में आतंकवाद बना रहे, ताकि उससे उलझने में भारत की ऊर्जा खत्म हो जाए।
- भारत की दो खदानें और गुजरात की दवा फैक्टरी पर आतंकी हमला होता तो इससे अमेरिका राष्ट्रीय सुरक्षा को बड़ा नुकसान पहुंचता
- मुंबई हमलों से पहले ही लश्कर-ए-ताइबा पर लगाम चाहता था अमेरिका
- लश्कर-ए-ताइबा की मोदी को मारने की साजिश थी।
- अमेरिका ने चली थी दोहरी चाल, नही चाहता था कि मुंबई हमले में पाक की भूमिका सार्वजनिक हो।

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