Tuesday, December 21, 2010
अक्षम शिवराज पर था सोनिया गांधी का हाथ
मुंबई में 26 नवंबर 2008 को हुए हमले के बाद अमेरिका को लगा था कि गृहमंत्री के रूप में शिवराज पाटिल का हटाया जाना अपरिहार्य है। हालांकि इससे पहले विभिन्न शहरों में आतंकी हमलों के दौरान लापरवाही बरतने के बावजूद कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के वरदहस्त के चलते अपनी कुर्सी बचाने में कामयाब रहे थे। विकिलीक्स की ओर से जारी गोपनीय अमेरिकी दस्तावेजों के अनुसार तत्कालीन अमेरिकी राजदूत डेविड मलफोर्ड ने कहा था कि कांग्रेस चाहती थी कि राजनीतिक नुकसान कम से कम हो, क्योंकि वह 26 नवंबर 2008 को हुए मुंबई हमले से निपटने को लेकर गहरे राजनीतिक संकट से गुजर रही थी। मलफोर्ड ने कहा, ऐसे माहौल में, गृहमंत्री का हटाया जाना जरूरी था। उन्होंने पिछले चार साल में अपने आपको अयोग्य ही साबित किया था। तत्कालीन अमेरिकी राजदूत ने लिखा है कि आतंकवादी एवं सांप्रदायिक हिंसा की हर घटना, बेंगलूर, अहमदाबाद, जयपुर, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, गुवाहाटी, समझौता एक्सप्रेस, उड़ीसा, कर्नाटक, जम्मू-कश्मीर के दौरान पाटिल बिल्कुल सोते रहे। संदेशों में कहा गया है, हर बार उन्हें हटाए जाने की मांग उठती थी, लेकिन सोनिया गांधी उन्हें बचा लेती थीं, लेकिन मुंबई हमले के बाद ऐसी जन प्रतिक्रिया थी कि इस बार वह भी उन्हें बचा नहीं पाईं। गार्जियन में प्रकाशित इन गोपनीय संदेशों के अनुसार, लोगों को यह राजनीतिक संदेश देने के इरादे से पाटिल हटाए गए कि संप्रग सरकार मुंबई हमले को गंभीरता से ले रही है। मलफोर्ड ने लिखा है, हालांकि काफी देर से उठाया गया यह कदम कांग्रेस पार्टी के लिए मई 2009 (लोकसभा चुनाव) से पहले अपनी तकदीर बदलने के लिए बहुत ही छोटा कदम था। पूर्व अमेरिकी राजदूत ने कहा कि मनमोहन सिंह को प्रमुख नौकरशाहों को हटाने के लिए बढ़ रहे दबाव को इस तथ्य के साथ संतुलन बैठाना था कि राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार एमके नारायणन, गृह सचिव मधुकर गुप्ता और खुफिया ब्यूरो प्रमुख पीसी हलधर को हटाने का मतलब होगा उनके पास बिल्कुल नई टीम का आना, जिसे चीजों को समझने में वक्त लगता और इसे वह अपने कार्यकाल के शेष चार महीनों में सरकार चलाने की दृष्टि से उपयुक्त नहीं मानते थे।
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