बांग्लादेश में वर्ष 2008 के चुनाव से पहले राजनीतिक उथल-पुथल को लेकर भारत चिंतित था, क्योंकि उसे इस बात की आशंका थी कि सेना इस संकट के बहाने सत्ता पर नियंत्रण स्थापित कर सकती है। विकिलीक्स के खुलासे से यह बात जाहिर हुई। अमेरिका के ढाई लाख गोपनीय दस्तावेज और संदेश सार्वजनिक करने वाली वेबसाइट विकिलीक्स के मुताबिक भारत के विदेश मंत्रालय के आला अधिकारी ने अमेरिका और ब्रिटेन को संकेत दिया था कि तीनों ताकतों को बांग्लादेश की अंतरिम सरकार से विश्वसनीय चुनाव कराने के लिए कहना चाहिए और जोर देना चाहिए कि सेना राजनीति से बाहर ही रहे। विकिलीक्स के मुताबिक भारत के विदेश मंत्रालय में तत्कालीन संयुक्त सचिव मोहन कुमार ने नई दिल्ली स्थित अमेरिकी दूतावास में राजनीतिक परामर्शदाता टेड ओसियस और उनके ब्रितानी समकक्ष पाल्कंस एलेक्स से मुलाकात के दौरान इस बारे में बात की थी। विकिलीक्स की मानें तो मोहन कुमार ने कहा था कि शेख हसीना और खालिदा जिया की वापसी के बारे में बांग्लादेश की कार्यवाहक सरकार के फैसले ने देश को दोराहे पर ला दिया है। सरकार इन दो महिलाओं को राजनीतिक पटल से हटाने की नीति पर वापस आ गई। सरकार अब निर्धारित चुनावी कार्यक्रम को आगे बढ़ाने या सत्ता पर और ज्यादा समय तक काबिज रहने पर जोर देगी। विकिलीक्स के मुताबिक 27 अप्रैल 2007 की तारीख वाले एक गोपनीय संदेश में कहा गया है, मोहन कुमार ने एक तीसरा विकल्प भी पेश किया कि सेना या दोनों महिलाओं में से कोई एक अशांति को और बढ़ावा देगी जिसे बहाना बनाकर सेना सत्ता पर काबिज हो जाएगी। बांग्लादेश में खालिदा जिया का अक्तूबर 2006 में कार्यकाल खत्म होने पर फखरूद्दीन अहमद को मुख्य सलाहकार नियुक्त कर कार्यवाहकसरकार बनाई गई थी। इस साल भारत-पाक के बीच शांति प्रक्रिया में नहीं हुई खास प्रगति इस्लामाबाद, एजेंसी : भारत-पाकिस्तान के बीच इस साल शांति प्रक्रिया को जीवित करने के प्रयास सफल नहीं रहे हैं। विकिलीक्स की ओर से जारी किए गए गोपनीय अमेरिकी राजनयिक संदेशों को सार्वजनिक किए जाने के बाद पाकिस्तान और इसके महत्वपूर्ण सहयोगी अमेरिका के बीच संबंधों में तनाव देखने को मिला। वॉशिंगटन द्वारा अफगानिस्तान की सीमा से लगते अशांत कबाइली इलाकों में आतंकी पनाहगाहों के खिलाफ कार्रवाई का दबाव बनाए से इस्लामाबाद ने काफी बेचैनी महसूस की। नवंबर 2008 में मुम्बई हमलों के मद्देनजर भारत द्वारा पाकिस्तान के साथ समग्र वार्ता प्रक्रिया स्थगित किए जाने के 18 महीने बाद दोनों देशों के नेताओं और अधिकारियों ने शांति प्रक्रिया को पुनर्जीवित करने के लिए जुलाई में इस्लामाबाद में मुलाकात की। हालांकि पाकिस्तान द्वारा कश्मीर समस्या सहित सभी मुद्दों पर बातचीत के लिए समयसीमा की जिद किए जाने पर दोनों देशों के विदेश मंत्रियों के बीच बातचीत बेनतीजा समाप्त हो गई। भारत ने कहा कि शांति प्रक्रिया सीधे पाकिस्तान में मौजूद मुम्बई हमलों से जुड़े संदिग्ध आतंकवादियों के मुकदमे और पाकिस्तानी धरती से संचालित आतंकी गतिविधियों के खात्मे से जुड़ी है। दूसरी ओर पाकिस्तान समग्र वार्ता की बात करता रहा है। उसका कहना है कि हमें केवल आतंकवाद पर ध्यान केंद्रित नहीं करना चाहिए।
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