Pages

Wednesday, June 29, 2011

आरटीई से बाहर ही रहेंगे नवोदय विद्यालय


शिक्षा का अधिकार कानून के चलते दाखिलों को लेकर मुश्किलों से जूझ रहे देश के लगभग छह सौ नवोदय विद्यालय अब राहत की सांस ले सकते हैं। लगभग नौ महीने की कवायद के बाद कानून मंत्रालय ने दूसरों स्कूलों से बिल्कुल अलग इन आवासीय विद्यालयों को शिक्षा का अधिकार कानून (आरटीई) के दायरे से बाहर रखने पर रजामंदी दे दी है। सूत्रों के मुताबिक मानव संसाधन विकास मंत्रालय के तर्को और अटार्नी जनरल की फिर से राय लेने के बाद कानून मंत्रालय अंतत: नवोदय विद्यालयों को शिक्षा का अधिकार कानून की परिधि से बाहर रखने पर सहमत हो गया है। अलबत्ता उसने मानव संसाधन विकास मंत्रालय को इसके लिए जरूरी कदम उठाने को कहा है। सूत्र बताते हैं कि इसके लिए कानूनी प्रावधानों की रोशनी में स्पष्टीकरण की अधिसूचना जारी की जा सकती है, लेकिन शिक्षा का अधिकार कानून में संशोधन की बाबत एक विधेयक संसद में लंबित होने के कारण यह अभी संभव नहीं है। अलबत्ता उस संशोधन विधेयक के पारित होने के बाद इस बाबत जारी अधिसूचना में उसे पिछली तारीखों से लागू का प्रावधान किया जाना सकता है। गौरतलब है कि नवोदय विद्यालयों में दाखिले के लिए अखिल भारतीय स्तर पर हर साल फरवरी में प्रवेश परीक्षा होती है। नया शैक्षिक सत्र जुलाई में होना है, लेकिन कानूनी अड़चनों के चलते प्रवेश परीक्षा अभी नहीं हो सकी है। सूत्र बताते हैं कि कानून मंत्रालय की हरी झंडी मिलने के बाद अब जुलाई में ही प्रवेश परीक्षा कराने की तैयारी है। कोशिश है कि जुलाई के अंत तक दाखिले प्रक्रिया पूरी कर ली जाये, ताकि शैक्षिक सत्र शुरू होने में ज्यादा विलंब न होने पाए। शिक्षा का अधिकार कानून के प्रावधान के तहत किसी भी स्कूल में दाखिले के लिए बच्चे या उसके माता-पिता का स्क्रीनिंग टेस्ट (प्रवेश परीक्षा आदि) नहीं लिया जा सकता। साथ ही हर स्कूल में कमजोर वर्गो के छात्रों के लिए 25 प्रतिशत सीटें आरक्षित होंगी। चूंकि नवोदय विद्यालयों में दाखिले के लिए चयन का आधार प्रवेश परीक्षा है। नवोदय विद्यालयों के ऐसा न करने के कारण ही राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने नवोदय विद्यालयों में पिछले साल इस प्रक्रिया से हुए दाखिले को निरस्त करने का नोटिस दे दिया था। जाना जा सकता है कि देश के 596 नवोदय विद्यालयों में छठवीं कक्षा की लगभग 47 हजार सीटों पर दाखिले के लिए केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) देश भर में हर साल एक ही दिन में प्रवेश परीक्षा कराता है।


Wednesday, June 15, 2011

2050 में उड़ेगा भविष्य का हैरतअंगेज पारदर्शी विमान


भविष्य की विमान यात्रा दुर्लभ और हैरतअंगेज नजारों से भरपूर ही नहीं बल्कि एडवेंचर स्पोर्ट्स के शौकीनों के लिए यह बहुत ही सहज और सुलभ सफर होगा। 2050 तक उपलब्ध होने वाले यात्री विमान पारदर्शी होंगे। इससे उनकी बनावट कमजोर नहीं होगी बल्कि इस डिजाइन से वह विमान का ही नहीं बल्कि आसमान और धरती के खूबसूरत दृश्यों से रूबरू हो सकेंगे। ब्रिटिश कंपनी एयरबस ने अगले चालीस सालों में हवाई सफर की एक नई अवधारणा रच ली है। भविष्य के यह विमान सिर्फ बाहरी डिजाइन से ही नहीं बल्कि आंतरिक व्यवस्था और साज-सज्जा में भी क्रांतिकारी परिवर्तन लेकर आएंगे। इन विमानों में बिजनेस और इकॉनमी क्लास नहीं होंगे बल्कि इनकी जगह आराम करने के जोन लेंगे जो विमान के अगले हिस्से में होंगे। विमान के सामने और किनारे का अंदर-बाहर का पूरा दृश्य विमान के पारदर्शी होने के कारण बे-रोकटोक देखा जा सकेगा। कामकाज के लिए विमान के पिछले इलाके में एक अलग जोन बनाया जाएगा। इसके अलावा, मित्रों और बिजनेस एसोसिएट्स के साथ चर्चा-परिचर्चा के लिए विभिन्न प्रकार के पेयों से भरपूर बार भी होगा। विमान के अंदर की दीवारें रोशनी की जरूरत के मुताबिक बदल जाएंगी। केबिन की दीवारों की झिल्ली कमरे के तापमान को भी नियंत्रित करेगी। यही झिल्ली जरूरत पड़ने पर विमान को पारदर्शी भी बना देगी। ताकि यात्री बाहर का नजारा ले सकें। होलोग्राफिक तकनीक से गेम्स खेले जा सकेंगे। वर्चुअल गोल्फ से लेकर कई आउटडोर गेम भी संभव होंगे। यात्रियों के शरीर के तापमान से मिली ऊर्जा से मनोरंजक कार्यक्रम दिखाए जाएंगे। आरामदेह सीटें और अन्य तकनीकें तो फिर भी अस्तित्व में आई हैं लेकिन पर्यावरण के अनुकूल विमान की बॉडी को पारदर्शी बनाना और उसकी मजबूती को भी बरकरार रखने के लिए किस धातु का इस्तेमाल होगा यह अभी तक उजागर नहीं किया गया है। विमान के केबिनों में विटामिन और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर हवा होगी। यात्रियों को मानसिक और शारीरिक आराम देने के लिए विमान में अरोमा थेरेपी, एक्यूप्रेशर आदि का भी इंतजाम रहेगा। इंटरएक्टिव जोन में बातचीत करने और लोगों से संपर्क करने का पूरा इंतजाम होगा। एयरबस की इस भावी लक्जरी सेवा पर कंपनी के इंजीनियरिंग एक्जिक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट चा‌र्ल्स चैंपियन का कहना है कि उनकी रीसर्च के मुताबिक 2050 में यात्री बिंदास सफर करना चाहेंगे। वह पर्यावरण का भरपूर ख्याल रखते हुए उसका भरपूर अनुभव भी करेंगे। एयरबस के इस विमान को बनाने पर लंदन के ग्रीनविच में स्थित प्रयोगशाला में काम चल रहा है।


Wednesday, June 1, 2011

संचार तकनीक के हर रास्ते में खुफिया खिड़की


वे केवल आपके फोन को टेप कर ही मुतमइन नहीं हैं। उन्हें आपका हर संवाद सुनना है, चाहे वह महाजटिल संचार तकनीक के जरिये हुआ हो, क्योंकि आपकी हिफाजत को हजार खतरे जो हैं। देश की खुफिया एजेंसियों ने वॉयस फोन और टेक्स्ट मैसेज से पार संचार की सभी अत्याधुनिक तकनीकों की निगरानी का फरमान जारी कर दिया है। तकनीकी क्षमताएं बनाने और निजी कंपनियों को राजी करने की टोपी दूरसंचार विभाग के सिर पर है। खुफिया एजेंसियों ने टैपिंग के लिए जो नई फरमाइशी लिस्ट सरकार को सौंपी है उसमें वे सारे माध्यम मौजूद हैं जिनका इस्तेमाल गोपनीय संदेश भेजने में होता है। कूट भाषा (इनक्रिप्शन) इन तकनीकों की जान है। खुफिया एजेंसिया सिक्योर्ड सॉकेट लेयर (एसएसएल) और स्टेग्नोग्राफी से लेकर वीडियो चैट और तमाम पुश मेल तक के भीतर झांकना और परखना चाहती हैं। यह सूची मोबाइल मेल की नई पीढ़ी को समेट लेती है जिसमें नोकिया, मोटरोला, सेवेन नेटवर्क, विंडोज की मोबाइल मेल व हश मेल, जी मेल आदि शामिल हैं। कंप्यूटर, वायरलेस दूरसंचार, मोबाइल डिवाइस, नेटवर्किंग आदि सभी को अपनी दायरे में लेने वाली ये नई तकनीकें इनक्रिप्शन प्रणाली पर काम करती हैं, जिन्हें खोलने की कुंजी संवाद भेजने और पाने वाले या फिर उन कंपनियों के पास होती है जो यह सेवा देती हैं। यही वह पेंच है, जिसे लेकर दूरसंचार विभाग, गृह मंत्रालय और आपरेटर आपस में उलझे हैं। उनके बीच निगरानी के तरीके पर खींचतान कायम है। गृह मंत्रालय का साफ कहना है कि इनक्रिप्टेड संवाद या मेल खोलने में एजेंसियों की मदद करन को जिम्मा आपरेटरों का है और संवाद का ब्योरा सामान्य भाषा में लिखकर खुफिया एजेंसियों दिया जाना चाहिए। दूरसंचार विभाग का कहना है कि कूट भाषा वाले संदेशों को खोलने की कुंजियां एक सिस्टम में सुरक्षित की जाएं। खुफिया एजेंसियां जब चाहें उसके जरिये मैसेज खोल लें। दूरसंचार विभाग की एक उच्चस्तरीय समिति इस मामले को हल करने की कोशिश कर रही है, लेकिन लगता है कि इस मामले में खुफिया एजेंसियां भारी पड़ेंगी और गुप्त भाषा में गुंथे संवादों को खोलकर खुफिया विभाग को पढ़वाने का जिम्मा अंतत:, आपरेटरों के सिर आएगा। संवादों की तकनीकी गुत्थियां कोई भी खोले, अब आपकी गोपनीयता बरकरार रहना मुश्किल है.

अपनी सेना पर भरोसा नहीं करती पाकिस्तान सरकार


विकिलीक्स की मानें तो पाक सरकार का नेतृत्व अपनी सेना पर कतई भरोसा नहीं करता। खुफिया वेबसाइट की ओर से सार्वजनिक किए गए गुप्त अमेरिकी कूटनीतिक दस्तावेजों में बताया गया है कि पाक सरकार ने वॉशिंगटन से शिकायत की थी कि सेना को मिलने वाली सहायता के बारे में उसे अंधेरा में रखा जा रहा है। आतंक के खिलाफ युद्ध के लिए दिए जाने वाले धन का उपयोग सेना दूसरे कामों के लिए कर रही है। विकिलीक्स द्वारा डॉन अखबार को मुहैया कराए गए इन गुप्त संदेशों से इस बात का खुलासा हुआ है कि आतंकवाद निरोधी अभियान के लिए मिल रहे धन के इस्तेमाल को लेकर पाकिस्तान सरकार और ताकतवर सेना के बीच तनाव था। एक संदेश के मुताबिक, तत्कालीन वित्त मंत्री शौकत तरीन ने पूर्व अमेरिकी राजदूत एनी पीटरसन को नवंबर 2009 में एक मुलाकात के दौरान पाक सेना को अमेरिका से मिलने वाली राशि के बारे में बताने को कहा। तरीन ने कहा कि अमेरिकी सहायता पर आधारित सैन्य बजट को वह कम नहीं करेंगे, लेकिन यह साफ कर दिया कि उनके मंत्रालय को संपूर्ण बजटीय उद्दश्यों से इन बातों की जानकारी रखने की जरूरत है। उन्होंने अमेरिकी राजदूत को शिकायत की कि सेना प्रमुख जनरल अश्फाक परवेज कियानी यह सूचना उन तक नहीं पहंुचाते। सितंबर 2009 को एक अन्य बैठक में पीटरसन ने कहा कि अमेरिका ने सेना के लिए 37 करोड़ अमेरिकी डॉलर के उपकरण अपने पाकिस्तानी आतंकरोधी क्षमता कोष के माध्यम से खरीदा, लेकिन तरीन ने कहा कि उन्हें इस बात की जानकारी नहीं है। एक कुटनीतिक संदेश में खुलासा किया गया कि नवंबर 2009 की बैठक के दौरान तरीन ने इस बात के आंकड़े पेश किए कि आतंक के खिलाफ युद्ध में पाक खर्चे को वहन करने के लिए दिए जाने वाली अमेरिकी राशि सेना या आतंक रोधी मकसदों के लिए खर्च नहीं की जा रही.