विकिलीक्स ने पाकिस्तान के बारे में भी कई रहस्योद्घाटन किए हैं। इससे वहां के अवाम और राजनीति के क्षेत्र में भूचाल सा आ गया है। इसे मुस्लिम देशों को आपस में लड़ाने और उनके बीच गलतफहमियां पैदा करने के प्रयास के रूप में भी देखा जा रहा है। जसारत का कहना है कि विकिलीक्स रिपोर्टों में राजनीति तथा सैन्य नेतृत्व को लक्ष्य में रखा गया है। पाक में पूर्व अमेरिकी राजदूत एनडब्ल्यू पीटरसन द्वारा जारी रिपोर्ट में कहा गया था कि पाक का कोई भी हाकिम और अमेरिकियों को भरोसे में लिए बिना कोई काम नहीं करता। ऐसी रिपोर्टों ने पाक सियासत और नीति निर्धारण में अमेरिकी हस्तक्षेप को ही प्रमाणित किया है। वैसे ये रिपोर्ट पाक जनता तथा राजनीति में रुचि रखने वालों के लिए कोई नई जानकारी नहीं है। इन रिपोर्टों ने सिर्फ ये बात प्रमाणित की है कि ब्रिटेन से आजादी के बाद हम अमेरिका के गुलाम बन चुके हैं। जंग के अनुसार विकिलीक्स के राज अधिकतर उन देशों से संबद्ध हैं, जिनसे वाशिंगटन का हित जुड़ा है। मसलन लादेन और मुल्ला उमर की पाक में मौजूदगी, आतंकवाद के खिलाफ पाक की अनेक कुर्बानियों के बावजूद अमेरिका द्वारा उपेक्षा, समुद्र जैसे विशाल आर्थिक नुकसान की अपेक्षा बूंद बराबर दी गई सहायता में घपले के आरोप, पाक का उत्तरी क्षेत्र आतंकियों का पनाहगाह, पाक के परमाणु प्रतिष्ठान असुरक्षित होने आदि जैसी बातें प्रचार माध्यमों तक पहुंच जाती हैं, लेकिन भारत की पाक सीमा के निकट सैन्य दस्तों तथा हथियारों को युद्ध के लिए तैयार रखने की रणनीति, भारतीय हिस्से के कश्मीर में मानवाधिकार का उल्लंघन को उजागर करने की मात्र खानापूरी ही की जाती है। औसाफ लिखता है कि अमेरिका के कारण हमारे सियासतदानों को शर्मिंदगी उठानी पड़ रही है। ये तो सबके सामने है ही लेकिन चिंता की बात ये है कि आखिर अमेरिका में ऐसी क्या बात है कि हमारा अहम ओहदेदार उसके फरेबी जाल में फंस जाते हैं। वो वही करते हैं जो अमेरिका चाहता है। साठ के दशक में हमारे प्रधानमंत्री लियाकत अली खान रूस जाते-जाते अमेरिका पहुंच जाते थे। एक और उर्दू दैनिक मशरिक ने लिखा है कि विकिलीक्स की रिपोर्ट के अनुसार सऊदी अरब के शाही खानदान का ख़याल है कि पाकिस्तान में नागरिक शासन के बजाए सैन्य शासन बेहतर है। रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका में सऊदी राजदूत अलजुबैर ने कहा कि नवाज शरीफ ने दस वर्ष तक राजनीति में भाग नहीं लेने का वादा किया था, लेकिन पांच साल बाद ही वादा तोड़ दिया। नवाज शरीफ की गिरफ्तारी पर सहमति बनी और गिरफ्तार कर सऊदिया भेजा गया। राजदूत के अनुसार नवाज इकलौते ऐसे व्यक्ति हैं, जिनको सऊदी सरकार ने कारोबार के लिए कर्ज दिया, लेकिन नवाज शरीफ समय से पहले ही अति व्यस्त हो गए और लंदन से पाकिस्तान जा कर वादा तोड़ दिया।
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