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Saturday, December 25, 2010

असांजे का सच

सच उजागर करने के कारण आज उन पर पूरी दुनिया की नजर


राजनीतिबाजों ने भाषा ऐसी गढ़ी है, जिसमें झूठ सच सुनाई देता है, हत्या सम्मानजनक कृत्य लगती है, शुद्ध हवा ठोस दीवार बन जाती है।
मानवीय संघर्ष वामपंथ बनाम दक्षिणपंथ के बीच या आस्था बनाम तर्क के बीच नहीं होता, बल्कि व्यक्ति बनाम व्यवस्था के बीच होता है।
आप क्या बता सकते हैं कि इन दोनों उद्धरणों के नीचे किसका नाम हो सकता है? अगर शब्द और वाक्य रचना थोड़ी बदल दी जाए, तो इसे आसानी से हमारे राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के नाम से चलाया जा सकता है, हालांकि उन्होंने कभी ऐसा नहीं कहा। हमें नहीं मालूम कि विकिलीक्स के संस्थापक जूलियन असांजे का महात्मा गांधी से कोई लगाव है या नहीं, लेकिन सच यह है कि ऊपर के दोनों वाक्य उनके ही हैं!
जूलियन असांजे के खिलाफ आज दुनिया भर की सरकारें लगी हुई हैं। ये पंक्तियां लिखे जाने के समय वह इंग्लैंड की जेल से रिहा हुए हैं और अमेरिकी उन्हें अपनी जेल में ले जाने का तिकड़म भिड़ाने में लगे हुए हैं। जिस अपराध में उन पर मुकदमा चलाया गया और आगे भी जिसे खींचा जाएगा, उसका नाता औरतों से हैं। स्वीडन की दो लड़कियों ने ये आरोप लगाए हैं कि असांजे ने उनके साथ जबरन शारीरिक संबंध बनाए। यह आरोप उस आरोप की तुलना में बहुत हलका है, जो असांजे ने अब दुनिया के शक्ति संतुलन में बच रही एकमात्र महाशक्ति अमेरिका पर लगाए हैं। बेशक बलात्कार का आरोप किसी भी तरह से हलका नहीं होता, पर जिस पृष्ठभूमि में असांजे पर यह आरोप लगाया गया है, वह इसकी गहनता को कहीं पीछे ठेल देता है।
असांजे पर स्वीडन में दो लड़कियों के साथ बलात्कार करने का आरोप लगाया गया है। जबकि असांजे का आरोप है कि अमेरिकी सत्ताधीशों ने सारी दुनिया के आम लोगों के साथ बलात्कार किया! विकिलीक्स के नाम से जो दस्तावेज लगातार हमारे सामने आ रहे हैं, वे अमेरिकी सत्ता का बेहद काइयां और खूंखार चेहरा उजागर करते हैं। असांजे अपनी ओर से कोई आरोप नहीं लगा रहे। वह सिर्फ इतना कर रहे हैं कि लाखों पृष्ठों के वे दस्तावेज सबके सामने ला रहे हैं, जिन्हें अमेरिकी सत्ता प्रतिष्ठान ने दुनिया की नजरों से छिप-छिपाकर लिखा है। विश्व शांति, आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक युद्ध, तानाशाही की जड़ें खोदने, लोकतंत्र की रक्षा करने जैसे महान उद्देश्यों के साथ जो मुहिम अमेरिका ने पिछले कुछ वर्षों में छेड़ी है, उसके पीछे की कहानी असांजे ने हमारे सामने रख दी-न अपनी ओर से एक शब्द लिखा और न अपना एक शब्द कहा, जो कुछ लिखा व कहा, सब अमेरिकी सत्ताधारियों ने!
ऐसा कहा जा रहा है कि आधुनिक तकनीक का बेजा इस्तेमाल कर असांजे नाम और नामा कमाना चाहते हैं। यह आरोप, संभव है, सच हो, लेकिन इस आरोप में ही कई सवाल छिपे हैं। मसलन यह कि क्या आधुनिक टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करना अपराध है? आईटी को आधुनिक ज्ञान माना जाता है और तमाम सरकारें तमाम तरह से इसका इस्तेमाल करती हैं। बहुराष्ट्रीय कंपनियां अपने प्रसार के लिए इसका उपयोग करती हैं, जासूसी आदि के लिए इनका इस्तेमाल होता है और यह सब वैध माना जाता है। अब तो ऐसी स्थिति आ गई है कि हमारे प्रधानमंत्री ने सार्वजनिक रूप से घोषणा कर दी है कि खुफिया तरीके से सरकारी महकमे आपका टेलीफोन/ई-मेल/एसएमएस आदि चुराएंगे ही, क्योंकि ऐसा करना राष्ट्रहित में जरूरी है। प्रधानमंत्री ने सावधानी के तौर पर इतना ही कहा कि ऐसा करने में सावधानी बरतनी चाहिए। अगर सरकारें जनहित में ऐसा कर सकती हैं, तो जनहित में आम जनता क्यों नहीं कर सकती? बौद्धिक, नैतिक और विवेक के जिस स्तर पर दुनिया भर में सरकारें काम करती हैं, क्या उसे देखने-जानने के बाद भी कोई यह कहने की हिम्मत कर सकता है कि सरकारें राष्ट्रहित का ज्यादा खयाल रखती हैं? विकिलीक्स के सारे खुलासे इसकी ही गवाही देते हैं कि दुनिया पर अपनी पकड़ रखने के लिए अमेरिका अपने तंत्र का कैसे इस्तेमाल करता है और दुनिया भर के राष्ट्र प्रमुखों के बारे में उसकी एजेंसियां उसे कैसी खबरें देती और कैसी टिप्पणियां करती हैं।
असांजे अपने व्यक्तिगत जीवन या व्यापार में अनैतिक हैं, तो उन्हें बेशक इसकी कानूनसम्मत सजा मिलनी चाहिए, लेकिन इससे विकिलीक्स के खुलासे दागदार कैसे हो जाते हैं? कोई ऐसा कैसे कह सकता है कि असांजे ने ये खुलासे करके देश की सुरक्षा या उसकी गोपनीयता पर हमला किया है?
विकिलीक्स के सारे खुलासे सचाई के द्वार भले न खोलते हों, लेकिन उस दरवाजे पर दस्तक जरूर देते हैं। यह बहुत संभव है कि असांजे ने इस द्वार तक पहुंचने के लिए वैसे साधन इस्तेमाल किए हों, जो एकदम पक्के-सच्चे न हों! इसके बावजूद हम उनके द्वारा जाहिर की गई भयावह सचाई को न तो ढक सकते हैं और न ही किसी तरह खारिज कर सकते हैं।
देश-दुनिया के आम लोग विकिलीक्स की जानकारियों को ध्यान में रखें और सरकारों की बुलंद घोषणाओं के पीछे की वास्तविकताओं को समझें, तो इन खुलासों का काम पूरा होता है। यह काम भी विकिलीक्स ने ही किया है कि बराक हुसैन ओबामा का चेहरा इतनी आसानी से और इतनी जल्दी उनके पूर्ववर्तीबुश के चहरे से मिलने लगा है! विकिलीक्स के खुलासों के बारे में ओबामा ने अगर खास कुछ नहीं कहा, तो इसमें हैरानी की कोई बात नहीं है। हैरानी तो इस बात की है कि मानवीय हक के इस हनन के बारे में भी ओबामा ने कुछ नहीं कहा। असांजे की तरफ दुनिया भर के आम लोगों की नजर रहनी भी चाहिए, क्योंकि उनके साथ आगे जो होगा, वह हममें से किसी के भी साथ हो सकता है। 

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