साल 2010 में माइक्रोब्लॉगिंग साइट ट्विटर के उपयोक्ताओं की संख्या तेजी से बढ़ी। साफ है कि ट्विटर की अहमियत को महत्व मिला, लेकिन मीडिया में ट्विटर से जुड़ी जिन खबरों ने सुर्खियां बटोरीं उनमें ज्यादातर महज आंकड़ों के इर्दगिर्द सिमटी दिखीं। सचिन तेंदुलकर ने प्रियंका चोपड़ा को पछाड़ा, आमिर ने पहले दिन ही बनाए पचास हजार फॉलोवर्स आदि-आदि जैसी सूचनाएं चर्चा में रहीं। भारत में इस साल ट्विटर किंग पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री शशि थरूर रहे। मास्टर ब्लास्टर सचिन दूसरे नंबर पर हैं। प्रियंका चोपड़ा तीसरे नंबर पर हैं। बॉलीवुड के बादशाह चौथे नंबर पर हैं, जिनके करीब सात लाख अड़तीस हजार प्रशंसक हैं। अमिताभ बच्चन के साढ़े पांच लाख प्रशंसक हैं, जबकि सलमान खान के पांच लाख अट्ठाइस हजार प्रशंसक हैं। आमिर खान ट्विटर छोड़ चुके हैं, लेकिन उनके चार लाख तैंतीस हजार से अधिक प्रशंसक अभी भी हैं। यानी भारत में इस साल दस लाख फॉलोवर्स जोड़ने में कोई भी हस्ती कामयाब नहीं हुई और अगले साल सबसे पहले यह कारनामा करने वाले मुख्य दावेदारों में शशि थरूर और सचिन तेंदुलकर ही हैं। पर सवाल यह है कि इन आंकड़ों से क्या होगा? ट्विटर पर किसके कितने प्रशंसक हैं-ये जानना क्या आम लोगों के लिए अहम है? शायद बिल्कुल नहीं क्योंकि, 140 अक्षरों की दुनिया की ताकत का फॉलोवर्स से लेना देना नहीं है। मान लीजिए कि आप शतरंज के खिलाड़ी हैं और आप सिर्फ शतरंज की दुनिया से संबंधित लोगों को फॉलो करते हैं और वो भी आपको फॉलो करते हैं ताकि शतरंज की गहरी चाल से लेकर इस दुनिया से जुड़ी हर खबर आप लोगों के पास पहुंचे। तो ट्विटर की अहमियत आपके लिए उन चंद फॉलोवर्स से है न कि फालतू के हजारों फॉलोवर्स से। दरअसल, ट्विटर की दुनिया को अब आम लोगों के आंकड़ों से आगे जाकर समझने की जरूरत है। ट्विटर के जरिये लोग अपने हमख्याल लोगों से जुड़े, नई सूचनाएं कहां से पाएं, सेलेब्रिटी के अलावा किसे फॉलो करें, ट्विटर से कैसे नेटवर्किंग करें और इससे कैसे आर्थिक संपन्नता का रास्ता तलाशें-ये अब पाठकों को बताए जाने की जरूरत है। नए साल में ऐसा होने की उम्मीद की जानी चाहिए। इस साल कुछ मौकों पर भारतीय ट्विटर समुदाय की एकता या एक समान रुचि के चलते अयोध्या पर फैसला और सचिन के दोहरे शतक जैसे मुद्दे वैश्रि्वक ट्रेंडिंग टॉपिक बने। नए साल में इस एकता को भी और बढ़ावा मिलना चाहिए।
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