वाशिंगटन। विकिलीक्स के ताजा खुलासे से पता चला है कि मुंबई हमले (26 नवंबर 2008) के करीब एक महीने बाद अमेरिकी दबाव में पाकिस्तान मामले की जांच से जुड़ी जानकारियां भारत के साथ साझा करने पर राजी हुआ था। इसके लिए वाशिंगटन ने मध्यस्थता कर दोनों देशों के बीच एक गोपनीय समझौता करवाया था।
बीबीसी ने विकिलीक्स के हवाले से बताया है कि पाकिस्तान में तत्कालीन अमेरिकी राजदूत एनी पैटरसन द्वारा तीन जनवरी 2009 को वाशिंगटन भेजे गए एक संदेश से इसका खुलासा हुआ है। इस केबल संदेश के दो दिन बाद ही भारत ने मुंबई हमले की जांच से जुड़ी सामग्री पाकिस्तान के उच्चायुक्त को सौंपी थी। पैटरसन ने कहा, अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए के इस आश्वासन के बाद कि सूचनाएं सिर्फ खुफिया एजेंसियों के बीच रहेंगी, पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के मुखिया लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शुजा पाशा इसलामाबाद द्वारा की गई जांच की ‘टियरलाइन’ सूचनाएं भारतीय खुफिया एजेंसियों से साझा करने पर सहमत हो गए। खुफिया दृष्टि से ‘टियरलाइन’ जानकारियां सिर्फ खुफिया एजेंसियों के बीच साझा की जाती हैं और इनका विदेशी सरकारों से साझा की जाने वाली सूचनाओं से अंतर होता है। पैटरसन चाहते थे कि वाशिंगटन भारत पर दबाव डाले कि वह मुंबई हमले की जांच से जुड़ी सूचनाएं सार्वजनिक न करे, क्योंकि इससे सूचनाओं की साझेदारी पर हुआ समझौता खतरे में पड़ जाएगा। अगर भारत अपनी जांच के नतीजों का खुलासा करके पाकिस्तान पर दबाव बनाएगा तो इससे पाक खुफिया एजेंसियों द्वारा की जांच में समस्या आएगी। इससे पाकिस्तानी अवाम की नाराजगी बढ़ेगी और पाशा की स्थिति कमजोर होगी।
एजेंसी
पांच जनवरी 2009 के एक और संदेश से पता चलता है कि पाशा ने जरदारी को बताया था कि वह टियरलाइन सूचनाएं भारतीय अधिकारियों को देने पर राजी हैं।
एजेंसी
तत्कालीन अमेरिकी राजदूत पैटरसन ने वाशिंगटन से जांच के नतीजों को सार्वजनिक न करने के लिए भारत पर दबाव डालने को कहा था
‘भारत का बचकाना कदम बताया था’
एक संदेश में पैटरसन ने कहा था कि जांच खत्म होने से पहले मुंबई हमले की जांच से जुड़ी सूचनाएं सार्वजनिक करना भारत का एक बचकाना कदम है।
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