नई दिल्ली। विकिलीक्स के खुलासों ने अमेरिका को नहीं बल्कि कांग्रेस पार्टी को भी हिला दिया है। दरअसल, विकिलीक्स ने भारत की अंदरूनी राजनीति को लेकर पहली बार बड़ा खुलासा करते हुए कहा है कि भारत में अमेरिका के पूर्व राजदूत डेविड मलफोर्ड ने मुंबई हमलों के बाद अमेरिका को संदेश भेजा था कि कांग्रेस अपने हित के लिए धर्म की राजनीति का भी सहारा ले सकती है। 26/11 के हमले के कुछ ही दिन बाद अल्पसंख्यक मामलों के तत्कालीन मंत्री और कांग्रेसी दिग्गज एआर अंतुले के बयानों पर मची सियासत को मलफोर्ड ने इसका आधार बनाया था।
कांग्रेस ने भले ही इस खुलासे की विश्वसनीयता पर ही सवाल खड़े किए हों लेकिन इन खुलासों से पार्टी मुश्किल में पड़ सकती है। कांग्रेस मीडिया विभाग के अध्यक्ष जनार्दन द्विवेदी ने कहा है कि जब इस सूचना की प्रमाणिकता का पता ही नहीं है, तो इस पर पार्टी क्यों प्रतिक्रिया देगी। उन्होंने मलफोर्ड के संदेश को लेकर कहा कि एक राजनयिक अपने देश को क्या रिपोर्ट देता है, यह उसका अपना आंतरिक विभागीय मामला है। इसमें पार्टी को कोई टिप्पणी करने की जरूरत नहीं है, लेकिन विकिलीक्स ने पूरे विस्तार से इसका खुलासा किया है।
इसके मुताबिक मुंबई हमलों के बाद अंतुले ने बयान दिया था कि एटीएस प्रमुख हेमंत करकरे की मौत के पीछे हिंदू आतंकवादियों का भी हाथ हो सकता है, लेकिन गृह मंत्री पी चिदंबरम ने इसे तुरंत खारिज कर दिया था। भाजपा ने अंतुले के इस बयान की आलोचना की थी और उनके इस्तीफे की मांग की थी। लेकिन दो दिन बाद ही कांग्रेस की ओर से एक अलग रुख वाला बयान जारी किया गया। इस बार अंतुले को अल्पसंख्यक समुदाय के कई सांसदों का समर्थन भी मिला था। यह दस्तावेज 23 दिसंबर, 2008 को नई दिल्ली में तत्कालीन अमेरिकी राजदूत मलफोर्ड ने अपने देश के विदेश विभाग को भेजा था। इसमें मलफोर्ड ने कहा कि अंतुले के बयान से खुद को अलग करने के दो दिन बाद ही कांग्रेस ने एक विवादास्पद बयान जारी किया, जिससे साजिश के बारे में संदेह को बल मिला। उस समय अंतुले के पूरी तरह से बेबुनियाद दावों को भारतीय मुसलिम समाज से भी समर्थन मिला। मलफोर्ड के मुताबिक आगामी चुनावों में लाभ उठाने के लिए कांग्रेस ने अंतुले के बयान को खारिज करने के अपने रुख से पल्ला झाड़ लिया और खुद इस साजिश को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए।
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