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Thursday, December 30, 2010

एक चिप ने कंप्यूटर को बनाया 20 गुना तेज

लंदन। ग्लासगो यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने एक ऐसी अल्ट्रा फास्ट कंप्यूटर चिप बनाई है जो सामान्य डेस्कटॉप कंप्यूटर से 20 गुना अधिक तेज है। सामान्य पीसी में दो, चार या कुछ में 16 कोर होते हैं, लेकिन इस नए सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट यानी सीपीयू में वैज्ञानिकों ने एक चिप में एक हजार कोर डेवलप किए हैं। डॉ. विम वांडरबाउवेडे का कहना है कि यह नया सुपर कंप्यूटर सामान्य डेस्कटॉप से ज्यादा अच्छा है। उन्होंने बताया कि इसकी एक चिप को अलग-अलग काम करने के लिए प्रोग्रामिंग किया गया है।

Tuesday, December 28, 2010

रिमोट ट्रिगर्ड लैब बनाएगी घर बैठे इंजीनियर

अब वह दिन दूर नहीं जब दूरदराज गांव में बैठा छात्र कंप्यूटर स्क्त्रीन पर इंजीनियरिंग की पूरी पढ़ाई पढ़ सकेगा। अभियांत्रिकी तकनीकी शिक्षा में थ्योरी के साथ लेबोरेट्री के सभी डिमोस्ट्रेशन प्वाइंट टू प्वांइट स्क्रीन पर ही हो सकेंगे। यह सब कुछ संभव होगा रिमोट ट्रिगर्ड लैब से। दयालबाग शिक्षण संस्थान ने 11 अन्य संस्थानों के सहयोग से इस लैब को तैयार किया है। देश के इंजीनियरिंग संस्थानों में छात्र-छात्राओं के सामने सबसे बड़ी समस्या बेहतर लेबोरेट्री का न होना है, वहीं इंटरनेट के युग में घर पर पढ़ाई करने वाले छात्रों को प्रैक्टिकल के लिए संस्थानों का सहारा लेना पड़ता है। अभियांत्रिकी तकनीकी में बेहतर आयाम बनाने के उद्देश्य से मंत्रालय स्तर पर इस प्रोजेक्ट की शुरुआत हुई थी। लैब तैयार करने का जिम्मा मंत्रालय द्वारा दयालबाग शिक्षण संस्थान के अलावा 11 अन्य तकनीकी संस्थानों को सौंपा गया। संस्थान के फिजिक्स एंड कंप्यूटर साइंस विभाग ने प्रोजेक्ट के तहत यह लैब तैयार की है। लैब तैयार करने वाले विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर (डीएलएसआई डिजाइन) डॉ. सीएम मारकन बताते हैं कि लैब सिस्टम की कनेक्टिविटी सैटेलाइट के जरिये इंटरनेट से जोड़ी जाएगी। इसमें लैब की वेबसाइट पर विशेषज्ञों की स्पीच, ई बुक्स, प्रैक्टिकल के लिए हर तरह के सर्किट का इस्तेमाल करने को प्वाइंट टू प्वाइंट सुविधा उपलब्ध होगी। वेबसाइट के माध्यम से छात्र कंप्यूटर पर लैब और थ्योरी की पूरी पढ़ाई बारीकी से कर सकेंगे। इसके माध्यम से वाइवा भी पंजीकृत होने वाले संस्थान में दिया जा सकेगा। उन्होंने बताया कि लैब तैयार हो चुकी है और संस्थान ने ट्रायल के तौर पर एनसीआर के 18 इंजीनयिरिंग संस्थानों को पंजीकृत किया है, जहां के छात्रों को सुबह 11 से चार बजे तक की कनेक्टिविटी दी जा रही है। देश भर में ट्रायल सफल रहा है। शीघ्र ही प्रोजेक्ट की फाइनल रिपोर्ट मंत्रालय को भेज दी जाएगी। ऐसे कर सकेंगे इस्तेमाल : भारत सरकार छात्रों को डेढ़ हजार रुपये में कंप्यूटर सुविधा देने की तैयारी कर रही है। इस कंप्यूटर पर इंटरनेट की कनेक्विटी मिलने के बाद इच्छुक छात्र संबंधित इंजीनियरिंग संस्थान से पंजीकरण कराएंगे और फिर इसके बाद उन्हें पासवर्ड एलॉट होगा। उस पासवर्ड के जरिये बेवसाइट पर वह लैब इस्तेमाल कर सकेंगे। एक लैब से पढ़ेंगे हजारों छात्र : अमूमन एक लैब में 20-25 छात्र-छात्राएं ही एक बार में लाभान्वित हो पाते हैं, मगर इस तरह की आधुनिक लैब से कई हजार छात्र-छात्राएं जुड़ सकेंगे। लैब डिजायनर डॉ. सीएम मारकन कहते हैं कि इससे अंडर ग्रेजुएट, पोस्ट ग्रेजुएट और शोधार्थी लाभान्वित हो सकेंगे। साथ ही लैब स्थापित करने में बजट का भी कम खर्चा होगा। लैब तैयार करने वाले संस्थान : दयालबाग शिक्षण संस्थान के अलावा आइआइटी दिल्ली, मुंबई, आइआइटी कानपुर, आइआइटी खरगपुर, आइआइटी मद्रास, आइआइटी रुड़की, आइआइटी गुवाहाटी, आइआइटी हैदराबाद, अमिृता यूनिवर्सिटी एवं दो अन्य।

Monday, December 27, 2010

आत्मकथा लिखने पर असांजे को मिलेंगे 11 लाख पाउंड

लंदन (एजेंसी)। अमेरिकी राजनयिक संदेशों का खुलासा कर सुर्खियों में आए विकीलीक्स वेबसाइट के संस्थापक जुलियन असांजे ने अपनी आत्मकथा के लिए 11 लाख पाउंड का करार किया है। असांजे ने कहा कि यह धन उन्हें स्वीडन में चल रहे दो महिलाओं के साथ यौन र्दुव्‍यवहार के मामलों में बचाव में मदद करेगा। संडे टाइम्सकी रिपोर्ट के मुताबिक मैं यह किताब नहीं लिखना चाहता लेकिन मुझे ऐसा करना होगा।असांजे ने कहा, ‘मैंने कानूनी लड़ाई के लिए पहले ही दो लाख पाउंड खर्च कर दिया है। मुझे खुद के बचाव और विकीलीक्स को चलाए रखने की जरूरत है।
अंसाजे स्वीडन प्रत्यर्पण किए जाने के खिलाफ लड़ाई लड़ रहे हैं। असांजे ने कहा कि उन्हें ब्रिटेन में सवालों का जवाब देकर खुशी होगी। उन्होंने आशंका जताई कि अगर वह स्वीडन लौटते हैं तो उन्हें अमेरिका प्रत्यर्पित किया जा सकता है जहां अमेरिकी उप राष्ट्रपति जोए बाइडन ने उन्हें हाईटेक आतंकवादीकरार दिया है। उन्हें अमेरिकी प्रकाशक अल्फेड ए क्नोप्फ से आठ लाख पाउंड मिलेंगे ।

मादक पदार्थ प्रवर्तन प्रशासन बना गुप्तचर संगठन

अमेरिकी संगठन के एजेंटों को कूटनीति और कानून प्रवर्तन के बीच संतुलन बनाना पड़ता है
न्यूयार्क (एजेंसी)। विश्व में मादक पदार्थ तस्करों की तलाशी का कार्य करने वाली अमेरिकी एजेंसी मादक पदार्थ प्रवर्तन प्रशासन (डीईए) पिछले कुछ वर्षों में वैश्विक गुप्तचर संगठन के रूप में परिवर्तित हो गई है। इसका कार्यक्षेत्र नशीले पदाथरें से कहीं दूर तक फैल गया है। वेबसाइट विकीलीक्स की ओर से जारी अमेरिका के गुप्त दस्तावेजों के मुताबिक यह संगठन अपना अभियान गुप्त रूप से चलाता है जिसके कारण इस पर खर्च अधिक आता है। इसके साथ ही इस संगठन को उन विदेशी राजनीतिज्ञों से भी बचना पड़ता है जो इसका इस्तेमाल अपने दुश्मनों के खिलाफ करना चाहते हैं। संगठन का खुफिया एजेंटों को एक बहुत बड़ा नेटवर्क है। इसके एजेंटों में मुम्बई हमला मामले में आरोपी डेविड हेडली भी शामिल था। इसने डीईए के लिए दोहरे एजेंट के रूप में काम किया। रिपोर्ट में कहा गया है कि इस संगठक के कामकाज की विस्तृत जानकारी दी गई है। इसमें कहा गया है कि संगठन के एजेंटों को ऐसे जगहों पर कूटनीति और कानून प्रवर्तन के बीच संतुलन बनाना पड़ता है जहां राजनीतिज्ञों को मादक पदार्थ तस्करों से दूर रहने को कहना कठिन होता है। उन्हें ऐसे स्थानों पर काम करना पड़ता है जहां मादक पदार्थ तस्करों का गिरोह एक छोटी सरकार की तरह होती है जिनका धन और हिंसा सरकारों पर भारी पड़ती है।

Sunday, December 26, 2010

ट्विटर की गति

साल 2010 में माइक्रोब्लॉगिंग साइट ट्विटर के उपयोक्ताओं की संख्या तेजी से बढ़ी। साफ है कि ट्विटर की अहमियत को महत्व मिला, लेकिन मीडिया में ट्विटर से जुड़ी जिन खबरों ने सुर्खियां बटोरीं उनमें ज्यादातर महज आंकड़ों के इर्दगिर्द सिमटी दिखीं। सचिन तेंदुलकर ने प्रियंका चोपड़ा को पछाड़ा, आमिर ने पहले दिन ही बनाए पचास हजार फॉलोवर्स आदि-आदि जैसी सूचनाएं चर्चा में रहीं। भारत में इस साल ट्विटर किंग पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री शशि थरूर रहे। मास्टर ब्लास्टर सचिन दूसरे नंबर पर हैं। प्रियंका चोपड़ा तीसरे नंबर पर हैं। बॉलीवुड के बादशाह चौथे नंबर पर हैं, जिनके करीब सात लाख अड़तीस हजार प्रशंसक हैं। अमिताभ बच्चन के साढ़े पांच लाख प्रशंसक हैं, जबकि सलमान खान के पांच लाख अट्ठाइस हजार प्रशंसक हैं। आमिर खान ट्विटर छोड़ चुके हैं, लेकिन उनके चार लाख तैंतीस हजार से अधिक प्रशंसक अभी भी हैं। यानी भारत में इस साल दस लाख फॉलोवर्स जोड़ने में कोई भी हस्ती कामयाब नहीं हुई और अगले साल सबसे पहले यह कारनामा करने वाले मुख्य दावेदारों में शशि थरूर और सचिन तेंदुलकर ही हैं। पर सवाल यह है कि इन आंकड़ों से क्या होगा? ट्विटर पर किसके कितने प्रशंसक हैं-ये जानना क्या आम लोगों के लिए अहम है? शायद बिल्कुल नहीं क्योंकि, 140 अक्षरों की दुनिया की ताकत का फॉलोवर्स से लेना देना नहीं है। मान लीजिए कि आप शतरंज के खिलाड़ी हैं और आप सिर्फ शतरंज की दुनिया से संबंधित लोगों को फॉलो करते हैं और वो भी आपको फॉलो करते हैं ताकि शतरंज की गहरी चाल से लेकर इस दुनिया से जुड़ी हर खबर आप लोगों के पास पहुंचे। तो ट्विटर की अहमियत आपके लिए उन चंद फॉलोवर्स से है न कि फालतू के हजारों फॉलोवर्स से। दरअसल, ट्विटर की दुनिया को अब आम लोगों के आंकड़ों से आगे जाकर समझने की जरूरत है। ट्विटर के जरिये लोग अपने हमख्याल लोगों से जुड़े, नई सूचनाएं कहां से पाएं, सेलेब्रिटी के अलावा किसे फॉलो करें, ट्विटर से कैसे नेटवर्किंग करें और इससे कैसे आर्थिक संपन्नता का रास्ता तलाशें-ये अब पाठकों को बताए जाने की जरूरत है। नए साल में ऐसा होने की उम्मीद की जानी चाहिए। इस साल कुछ मौकों पर भारतीय ट्विटर समुदाय की एकता या एक समान रुचि के चलते अयोध्या पर फैसला और सचिन के दोहरे शतक जैसे मुद्दे वैश्रि्वक ट्रेंडिंग टॉपिक बने। नए साल में इस एकता को भी और बढ़ावा मिलना चाहिए।

Saturday, December 25, 2010

मोबाइल सेट भी अब किए जा सकेंगे ब्लॉक

ट्राई ने दिया कंपनियों को सॉफ्टवेयर बनाने का निर्देश

नई दिल्ली। मोबाइल हैंडसेट खोने पर अब सिमकार्ड की तरह इन्हें भी ब्लॉक करना संभव हो सकेगा। भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) के ताजा निर्देशों से यह उम्मीद बंधी है। दरअसल, मोबाइल चोरी जाने, गुमने के बढ़ते मामलों के मद्देनजर ट्राई ने मोबाइल कंपनियों को हैंडसेट ब्लॉक करने का तरीका ईजाद करने का निर्देश दिया है। कंपनियों से मिले संकेतों के अनुसार इसके लिए सॉफ्टवेयर जल्द तैयार होने की संभावना है, लेकिन वे इसका शुल्क ग्राहकों से शुल्क वसूलना चाहती हैं।
अभी जब ग्राहक का मोबाइल सेट खोता है तो वह कंपनियों के कस्टमर केयर पर फोन कर अपना सिम कार्ड ब्लॉक करा सकता है। बाद में उसे डुप्लीकेट सिम कार्ड मिल जाता है। सूत्रों के मुताबिक, ट्राई ने अब मोबाइल कंपनियों से कहा है कि वह ऐसा हल खोजें जिससे कि हैंडसेट के आईएमईआई या फिर ईएसएन नंबर ही बंद कर दिया जाए। आईएमईआई नंबर यानी इंटरनेशनल मोबाइल इक्यूपमेंट आईडेंटिटी नंबर दरअसल जीएसएम मोबाइल हैंडसेटों के विशिष्ट पहचान नंबर होते हैं, वही ईएसएन यानी इलेक्ट्रॉनिक सीरियल नंबर सीडीएमए मोबाइल हैंडसेट के पहचान नंबर होते है। कंपनियां ट्राई के इन निर्देशों पर अमल करते हुए सॉफ्टवेयर बनाने पर काम तो कर रहीं हैं और इसके जल्द ही बाजार में आने की संभावना है। वैसे, साफ्टवेयर के विकास और सेवा को जारी रखने के लिए उन्हें काफी रकम खर्च करनी पड़ेगी।
इसके चलते कुछ कंपनियों ने ट्राई से इस सेवा के एवज में ग्राहकों से एक निश्चित राशि वसूलने की इजाजत देने की गुजारिश की है। कंपनियों का कहना है कि ट्राई ऐसी व्यवस्था बनाए कि अगर कोई भी ग्राहक उनको फोन कर अपना हैंडसेट ब्लॉक करने के लिए कहता है तो उसे (ग्राहक को )एक तय राशि अदा करनी पड़े। हालांकि यह राशि कितनी होगी, इसे लेकर अभी कुछ तय नहीं है। वैसे, सूत्रों के अनुसार यह राशि 50 से 60 रूपए के बीच हो सकती है। 

असांजे का सच

सच उजागर करने के कारण आज उन पर पूरी दुनिया की नजर


राजनीतिबाजों ने भाषा ऐसी गढ़ी है, जिसमें झूठ सच सुनाई देता है, हत्या सम्मानजनक कृत्य लगती है, शुद्ध हवा ठोस दीवार बन जाती है।
मानवीय संघर्ष वामपंथ बनाम दक्षिणपंथ के बीच या आस्था बनाम तर्क के बीच नहीं होता, बल्कि व्यक्ति बनाम व्यवस्था के बीच होता है।
आप क्या बता सकते हैं कि इन दोनों उद्धरणों के नीचे किसका नाम हो सकता है? अगर शब्द और वाक्य रचना थोड़ी बदल दी जाए, तो इसे आसानी से हमारे राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के नाम से चलाया जा सकता है, हालांकि उन्होंने कभी ऐसा नहीं कहा। हमें नहीं मालूम कि विकिलीक्स के संस्थापक जूलियन असांजे का महात्मा गांधी से कोई लगाव है या नहीं, लेकिन सच यह है कि ऊपर के दोनों वाक्य उनके ही हैं!
जूलियन असांजे के खिलाफ आज दुनिया भर की सरकारें लगी हुई हैं। ये पंक्तियां लिखे जाने के समय वह इंग्लैंड की जेल से रिहा हुए हैं और अमेरिकी उन्हें अपनी जेल में ले जाने का तिकड़म भिड़ाने में लगे हुए हैं। जिस अपराध में उन पर मुकदमा चलाया गया और आगे भी जिसे खींचा जाएगा, उसका नाता औरतों से हैं। स्वीडन की दो लड़कियों ने ये आरोप लगाए हैं कि असांजे ने उनके साथ जबरन शारीरिक संबंध बनाए। यह आरोप उस आरोप की तुलना में बहुत हलका है, जो असांजे ने अब दुनिया के शक्ति संतुलन में बच रही एकमात्र महाशक्ति अमेरिका पर लगाए हैं। बेशक बलात्कार का आरोप किसी भी तरह से हलका नहीं होता, पर जिस पृष्ठभूमि में असांजे पर यह आरोप लगाया गया है, वह इसकी गहनता को कहीं पीछे ठेल देता है।
असांजे पर स्वीडन में दो लड़कियों के साथ बलात्कार करने का आरोप लगाया गया है। जबकि असांजे का आरोप है कि अमेरिकी सत्ताधीशों ने सारी दुनिया के आम लोगों के साथ बलात्कार किया! विकिलीक्स के नाम से जो दस्तावेज लगातार हमारे सामने आ रहे हैं, वे अमेरिकी सत्ता का बेहद काइयां और खूंखार चेहरा उजागर करते हैं। असांजे अपनी ओर से कोई आरोप नहीं लगा रहे। वह सिर्फ इतना कर रहे हैं कि लाखों पृष्ठों के वे दस्तावेज सबके सामने ला रहे हैं, जिन्हें अमेरिकी सत्ता प्रतिष्ठान ने दुनिया की नजरों से छिप-छिपाकर लिखा है। विश्व शांति, आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक युद्ध, तानाशाही की जड़ें खोदने, लोकतंत्र की रक्षा करने जैसे महान उद्देश्यों के साथ जो मुहिम अमेरिका ने पिछले कुछ वर्षों में छेड़ी है, उसके पीछे की कहानी असांजे ने हमारे सामने रख दी-न अपनी ओर से एक शब्द लिखा और न अपना एक शब्द कहा, जो कुछ लिखा व कहा, सब अमेरिकी सत्ताधारियों ने!
ऐसा कहा जा रहा है कि आधुनिक तकनीक का बेजा इस्तेमाल कर असांजे नाम और नामा कमाना चाहते हैं। यह आरोप, संभव है, सच हो, लेकिन इस आरोप में ही कई सवाल छिपे हैं। मसलन यह कि क्या आधुनिक टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करना अपराध है? आईटी को आधुनिक ज्ञान माना जाता है और तमाम सरकारें तमाम तरह से इसका इस्तेमाल करती हैं। बहुराष्ट्रीय कंपनियां अपने प्रसार के लिए इसका उपयोग करती हैं, जासूसी आदि के लिए इनका इस्तेमाल होता है और यह सब वैध माना जाता है। अब तो ऐसी स्थिति आ गई है कि हमारे प्रधानमंत्री ने सार्वजनिक रूप से घोषणा कर दी है कि खुफिया तरीके से सरकारी महकमे आपका टेलीफोन/ई-मेल/एसएमएस आदि चुराएंगे ही, क्योंकि ऐसा करना राष्ट्रहित में जरूरी है। प्रधानमंत्री ने सावधानी के तौर पर इतना ही कहा कि ऐसा करने में सावधानी बरतनी चाहिए। अगर सरकारें जनहित में ऐसा कर सकती हैं, तो जनहित में आम जनता क्यों नहीं कर सकती? बौद्धिक, नैतिक और विवेक के जिस स्तर पर दुनिया भर में सरकारें काम करती हैं, क्या उसे देखने-जानने के बाद भी कोई यह कहने की हिम्मत कर सकता है कि सरकारें राष्ट्रहित का ज्यादा खयाल रखती हैं? विकिलीक्स के सारे खुलासे इसकी ही गवाही देते हैं कि दुनिया पर अपनी पकड़ रखने के लिए अमेरिका अपने तंत्र का कैसे इस्तेमाल करता है और दुनिया भर के राष्ट्र प्रमुखों के बारे में उसकी एजेंसियां उसे कैसी खबरें देती और कैसी टिप्पणियां करती हैं।
असांजे अपने व्यक्तिगत जीवन या व्यापार में अनैतिक हैं, तो उन्हें बेशक इसकी कानूनसम्मत सजा मिलनी चाहिए, लेकिन इससे विकिलीक्स के खुलासे दागदार कैसे हो जाते हैं? कोई ऐसा कैसे कह सकता है कि असांजे ने ये खुलासे करके देश की सुरक्षा या उसकी गोपनीयता पर हमला किया है?
विकिलीक्स के सारे खुलासे सचाई के द्वार भले न खोलते हों, लेकिन उस दरवाजे पर दस्तक जरूर देते हैं। यह बहुत संभव है कि असांजे ने इस द्वार तक पहुंचने के लिए वैसे साधन इस्तेमाल किए हों, जो एकदम पक्के-सच्चे न हों! इसके बावजूद हम उनके द्वारा जाहिर की गई भयावह सचाई को न तो ढक सकते हैं और न ही किसी तरह खारिज कर सकते हैं।
देश-दुनिया के आम लोग विकिलीक्स की जानकारियों को ध्यान में रखें और सरकारों की बुलंद घोषणाओं के पीछे की वास्तविकताओं को समझें, तो इन खुलासों का काम पूरा होता है। यह काम भी विकिलीक्स ने ही किया है कि बराक हुसैन ओबामा का चेहरा इतनी आसानी से और इतनी जल्दी उनके पूर्ववर्तीबुश के चहरे से मिलने लगा है! विकिलीक्स के खुलासों के बारे में ओबामा ने अगर खास कुछ नहीं कहा, तो इसमें हैरानी की कोई बात नहीं है। हैरानी तो इस बात की है कि मानवीय हक के इस हनन के बारे में भी ओबामा ने कुछ नहीं कहा। असांजे की तरफ दुनिया भर के आम लोगों की नजर रहनी भी चाहिए, क्योंकि उनके साथ आगे जो होगा, वह हममें से किसी के भी साथ हो सकता है।