Pages

Thursday, March 24, 2011

एक मोबाइल पांच लाख इस्तेमाल


ऑरलैंडो पिता जी चाचा जी से मिलने निकले थे अब कहां होंगे। बेटा अब तक कॉलेज से नहीं लौटा। बेटी तो सहेली के यहां से तो चल चुकी है। ..सबको अलग-अलग फोन करने की जहमत मत उठाइए। बस, आपके और आपके परिवार के सदस्यों के फोन एक नए तरह के फीचर (एप्लीकेशन) से लैस होने चाहिए और आप किसी को कॉल किए बगैर सेटेलाइट मैप के जरिए जान जाएंगे वह शहर में कहां है और सुरक्षित है। 8 जॉगिंग करते समय मोबाइल आपको पिछली कसरत का आंकड़ा बताए और सेहत की जानकारी देता जाए तो कैसा रहेगा। 8 सड़क पर कोई हादसा देखकर फोटो या वीडियो लेकर भेजने या किसी मुश्किल में होने पर एक बटन दबाकर अलर्ट भेजने की सुविधा मिल जाए, तो बड़ी राहत होगी। 8ताजमहल को देखते वक्त अगर आपका फोन गाइड बन जाए या खरीदारी से पहले फोन आपको अलग-अलग दुकानों पर उस उत्पाद की कीमत और उपभोक्ताओं की प्रतिक्रिया बताए तो फिर क्या कहना। मोबाइल फोन की नई दुनिया में यह सब कुछ संभव है। मोबाइल की नई पाठशाला में अब ए से एप्पल नहीं बल्कि एप्लीकेशन पढ़ाया जा रहा है। आइ फोन, आइ पैड, सैमसंग गैलेक्सी, ब्लैकबेरी प्लेबुक, एचटीसी जैसे स्मार्ट फोन और टैबलेट कंप्यूटर से सजी दूरसंचार की नई दुनिया मोबाइल के इस्तेमाल की हर कल्पना को सच करने में जुटी है। ऑरलैंडो के इस ऑरेंज काउंटी कन्वेन्शन सेंटर में सीटीआइए वायरलेस शो में मोबाइल एप्लीकेशन का शानदार नजारा है। यहां हर कोई मोबाइल के नए प्रयोगों यानी एप्लीकेशन (आमतौर पर ऐप्स) के दबदबे को दांतो तले अंगुली दबाकर देख रहा है। ताजा सूचना तक मोबाइल फोन के पांच लाख विभिन्न एप्लीकेशन इंटरनेट पर खुले एप्लीकेशन बाजारों में सज चुके हैं और डाउनलोड किए जा रहे हैं। यानी एक मोबाइल के पांच लाख इस्तेमाल। तकनीक और संचार की दुनिया के सूरमा कहते हैं कि अब धंधा फोन बेचने का नहीं, बल्कि एप्लीकेशन बेचने का है। बात भी सही है, क्योंकि अब फोन खरीदने वाला यह पूछता है कि यह फोन फलां ऐप यानी इस्तेमाल को सपोर्ट करेगा या नहीं। कहना मुश्किल है कि मोबाइल एप्लीकेशन का बाजार स्मार्ट फोन (उदाहरण के लिए आइ फोन) के कारण बना या फिर ऐप्स को उपभोक्ताओं तक पहुंचाने के लिए स्मार्ट फोन बनाए गए। लेकिन यह जानना कतई कठिन नहीं है कि नए इस्तेमाल के तरीकों ने मोबाइल फोन सेवा के कारोबार का तरीका बदल दिया है। मेटी लायके डेनमार्क की हैं और जॉगिंग के दौरान आपकी मेहनत पर नजर रखने वाले एप्लीकेशन बनाने वाली कंपनी की मालिक हैं। बताती हैं कि हजारों की संख्या में रोज लोग इसे डाउनलोड कर रहे हैं। इजरायल के निसिल बेनबेनस्ती भी यहां मौजूद हैं, जो टच फोन पर टाइप करने का तरीका बदल रहे हैं। नोकिया ओवी के जरिए यह एप्लीकेशन लोकप्रिय हो रहा है। निसिल व लायके जैसे कई लोग यहां जुटे हैं जो एक से एक नायाब ऐप्स लेकर आए हैं। ऐप्स का परिवार हजार तरह के गेम्स, फोटो, म्यूजिक, सूचना, मैप, विज्ञापन, शॉपिंग, बार कोड स्कैनिंग से लेकर डेटिंग के वास्ते दोस्त तलाशने से और नशे में होने पर कार चलाने से रोकने और टैक्सियों को आप तक पहुंचाने वाले इस्तेमालों तक फैल चुका है और लगातार बढ़ रहा है। ऐप्स के सहारे तमाम अन्य कारोबार और कंपनियां मोबाइल से जुड़ रहे हैं। दरअसल, ऐप्स की पूरी दुनिया एक खास किस्म के लोकतंत्र से निकली है। दुनिया की कुछ प्रमुख कंपनियों एप्पल, ब्लैकबेरी, माइक्रोसॉफ्ट और गूगल ने मिलकर स्मार्ट फोन के लिए बुनियादी संचालन की प्रणालियां विकसित कीं, जो बाजार में एप्पल, आइओएस 4, गूगल एंड्रायड, ब्लैकबेरी 6.0 और विंडोज फोन सेवन के नाम से जानी जाती हैं। इसके बाद का काम दुनिया की तकनीकी रचनात्मकता ने किया जिसके जरिए रोजाना दर्जनों नए एप्लीकेशन इंटरनेट के माध्यम से लोगों के फोन तक पहुंच रहे हैं। एप्लीकेशन की दुनिया अनंत हो चली है तभी तो अमेरिका का दूरसंचार नियामक एफसीसी अपने सरकारी सूचना तंत्र को फोन के स्मार्ट इस्तेमाल के लिए तैयार कर रहा है। इंटरनेट पर अब ऐसा भी एप्लीकेशन मौजूद है जिसके इस्तेमाल से दो लोगों की बातचीत को कूट भाषा (इनक्रिप्शन) में बदला जा सकता है। यानी किसी के लिए भी सुनना असंभव। ब्लैकबेरी से जूझ रहीं भारतीय खुफिया एजेंसियां पता नहीं इस एप्लीकेशन का क्या करेंगी। वैसे इस ऐप को बनाने वाली कंपनी क्रिप्टोजस के प्रमुख कहते हैं कि भारत में भी इसे डाउनलोड किया गया है|

No comments:

Post a Comment