अपराधों की जांच अब पहले से ज्यादा आसान हो सकती है। भारतीय मूल के वैज्ञानिक की अगुवाई वाले दल ने नया सॉफ्टवेयर और कलन विधियां (एल्गोरिद्म) विकसित की हैं। इनके जरिए हाथों से बनाए चेहरों के स्केच खुद ब खुद पुलिस के पास मौजूद डाटाबेस से मिलान हो जाएंगे। अमेरिका की मिशिगन स्टेट यूनिवर्सिटी (एमएसयू) के शोधकर्ताओं का कहना है कि एक बार इस्तेमाल करने पर उनके प्रोग्राम के निहितार्थ काफी बड़े होंगे। यूनिवर्सिटी में कंप्यूटर साइंस और इंजीनियरिंग के प्रोफेसर अनिल जैन ने इस शोध में मुख्य भूमिका निभाई है। यह शोध आइईईई ट्रांसेक्शन ऑन पैटर्न एनालिसिस एंड मशीन इंटेलीजेंस जर्नल में प्रकाशित हुआ है। एमएसयू में शोध छात्र ब्रेंडन क्लारे ने बताया कि आमतौर पर चश्मदीद द्वारा बताई गई जानकारी के आधार पर आर्टिस्ट स्केच बनाते हैं। उन्होंने कहा कि दुर्भाग्य से, अक्सर ऐसे स्केच में अपराधी के रूप का सटीक चित्रण नहीं हो पाता है। कुछ ऐसे सॉफ्टवेयर भी हैं जो चश्मदीद द्वारा बताए गए विवरण के आधार पर स्केच बना देते हैं। ये भी हालांकि प्रशिक्षित फोरेंसिक आर्टिस्ट के बनाए स्केच की अपेक्षा कम सटीक होते हैं। एमएसयू परियोजना पर कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग विभाग की पैटर्न रिकॉगनिशन एंड इमेज प्रोसेसिंग (पीआरआइपी) लैब में काम किया गया है। यह पहला बड़े स्तर पर किया गया प्रयोग है जिसमें फोटोग्राफ के साथ फोरेंसिक स्केच का मिलान किया गया और अभी तक इसके परिणाम बेहतरीन रहे हैं। क्लारे ने कहा कि हमने चेहरों की पहचान करने वाली शीर्ष प्रणालियों में से एक में उल्लेखनीय सुधार किया है।
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