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Sunday, January 23, 2011

अब आएंगे चिप वाले एटीएम कार्ड!


हो सकता है कि आने वाले समय में बैंक की ओर से आपको मैग्नेटिक स्टि्रप वाले एटीएम कार्ड के बजाए चिप वाला कार्ड दिया जाए। एटीएम धोखाधड़ी के बढ़ते मामलों को देखते हुए भारतीय रिजर्व बैंक जल्द ही बैंकों को एटीएम की उन्नत प्रणाली अपनाने के निर्देश दे सकता है। बाजार में खरीदारी करते समय पर्ची पर हस्ताक्षर करने की जगह आपको पिन का इस्तेमाल करना पड़ सकता है। रिजर्व बैंक द्वारा गठित एक कार्यसमूह की रिपोर्ट में ये सुझाव दिए गए हैं। रिपोर्ट मिलने के बाद रिजर्व बैंक ने कहा है कि वह सुझावों पर जल्द अमल करेगा। सूचना सुरक्षा, इलेक्ट्रॉनिक बैंकिंग और प्रौद्योगिकी जोखिम प्रबंधन पर सुझाव देने के लिए गठित इस कार्यसमूह ने बैंकिंग धोखधड़ी पर पुलिस विभाग में एक अलग प्रकोष्ठ बनाने का भी सुझाव दिया है। केंद्रीय बैंक के कार्यकारी निदेशक जी. गोपालकृष्ण के नेतृत्व में गठित कार्यसमूह की रिपोर्ट में कहा गया है कि रिजर्व बैंक को एटीएम और बिक्री केंद्रों पर रखी जाने वाली मशीनों के उन्नयन के बारे में सोचना चाहिए। कार्यसमूह ने बैंकिंग उद्योग के कामकाज में सूचना प्रौद्योगिकी प्रणाली में व्यापक बदलाव और बैंकिंग सेवाओं को ज्यादा सुरक्षित बनाने की जरूरत पर भी जोर दिया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि ऑनलाइन धोखाधड़ी के मामलों में कई बार अधिकार क्षेत्र को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। इससे पुलिस में शिकायत करने पर असमंजस बना रहता है। साइबर अपराधों की शिकायत के लिए पुलिस विभाग में एक अलग प्रकोष्ठ बनाया जाना चाहिए। इसके साथ ही कार्यसमूह ने यह भी सुझाव दिया है कि डेबिट कार्ड से होने वाले लेनदेन के मामले में बिक्री केंद्रों पर पिन के जरिए ही कारोबार होना चाहिए। वर्तमान में यह हस्ताक्षर के आधार पर होता है। रिजर्व बैंक ने इस कार्यसमूह की स्थापना अप्रैल 2010 में की थी। रिपोर्ट कहती है कि ऑनलाइन धोखाधड़ी की प्रकृति को देखते हुए इस मामले में जांच एजेंसियों, औद्योगिक संगठनों, शिक्षण संस्थानों और सरकारों के बीच राष्ट्रीय व अतरराष्ट्रीय स्तर पर बेहतर तालमेल की जरूरत है। इसमें कहा गया है कि साइबर अपराध आमतौर पर एक करोड़ रुपये से कम राशि के होते हैं, लेकिन इनकी संख्या लगातार बढ़ रही है। इसके मद्देनजर निदेशक मंडल की एक विशेष समिति को इनके बारे में लगातार पता रहना चाहिए, ताकि जरूरी कदम उठाए जाएं।

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