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Thursday, January 13, 2011

वायुसेना की ताकत बढ़ाएगा तेजस

भारतीय वायुसेना का अपने बेड़े में स्वदेशी युद्धक विमान शामिल करने का तीन दशक पुराना सपना साकार हो रहा है। इसके साथ भारत दुनियां का नौवां देश बन जाएगा जिसके पास युद्धक विमान बनाने की अपनी खुद की तकनीक होगी। इसके पहले अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, ब्राजील, चीन, स्वीडन, इजरायल और रूस स्वदेशी युद्धक विमान बना चुके हैं। हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड के बेंगलूर स्थित विमानतल पर रक्षा मंत्री एके एंटनी ने स्वदेशी तकनीक से बना हल्का लड़ाकू विमान तेजस वायुसेना को सौंप दिया। वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल पीवी नाइक को विमान की प्रारंभिक ऑपरेशन स्वीकृत मिलने के साथ ही चौथी पीढ़ी के सुपरसोनिक विमान तेजस के पहले स्क्वाड्रन के जन्म का भी रास्ता साफ हो गया है। रक्षा मंत्री के अनुसार 27 सालों के प्रयास और छोटे-बड़े 200 से भी ज्यादा केंद्रों की अथक मेहनत और साझा प्रयासों ने इस कार्यक्रम को सफल बनाया। करीब 25 हजार करोड़ रुपये की लागत और डेढ़ हजार से ज्यादा उड़ानों के सहारे तेजस इस मुकाम तक पहुंचा है। तेजस कार्यक्रम पर संतोष जताते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि सरकार ने 40 विमानों की खरीद को मंजूरी दे दी है। तेजस के विकास और सुधार की उम्मीद के साथ उन्होंने अगले साढ़े तीन से पांच सालों में इसके उन्नत मार्क-2 संस्करण के तैयार हो जाने की भी आशा जताई। रक्षा मंत्री ने बताया कि नौसेना और वायुसेना के युद्धक बेड़े को करीब 200 तेजस की जरूरत होगी। निर्धारित कार्यक्रम के मुताबिक इस साल के अंत तक वायुसेना के पास चार तेजस विमान होंगे। हालांकि कोयंबटूर के नजदीक सुलुर में तेजस की पहली दो स्क्वाड्रन को खड़ा होने में अभी दो साल लगेगा। विमान को अंतिम स्वीकृति अगले साल तक मिलेगी। चौथी पीढ़ी के इस हल्के लड़ाकू विमान का ढांचा बनाने में कम वजन वाले कार्बन कंपोजिट मेटेरियल का इस्तेमाल किया गया है। इसके अलावा इसे संचालन की खूबियों के साथ मल्टीरोल (बहुआयामी) क्षमताएं भी दी गई हंै। इसमें हवा से हवा और हवा से सतह पर मारक क्षमता के अलावा अवाक्स सिस्टम भी लगाया गया है। एम्ब्रीयर में लगने वाले इस सिस्टम के जरिये तेजस हवा में भी दूर से आने वाले दुश्मन के लड़ाकू विमानों पर नजर रख सकेगा। इसके अलावा उन्नत मध्यम लड़ाकू विमान (एमसीए) को तैयार करने की योजना भी आगे बढ़ रही है। गणतंत्र दिवस पर तेजस की मौजूदगी अभी तय नहीं वायुसेना में शुमार होने की तैयारी कर रहा स्वदेशी हल्का लड़ाकू विमान इस बार गणतंत्र दिवस परेड में नजर न आए तो आश्चर्य नहीं कीजिएगा। हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड को अभी तक रक्षा मंत्रालय से इस विमान को परेड का हिस्सा बनाने को लेकर हरी झंडी नहीं मिली है। सूत्रों के मुताबिक विमान को परेड का हिस्सा बनाने को बेताब एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी और एचएएल अब भी इस कोशिश में हैं कि वायुसेना के बड़े विमान में इसे दिल्ली पहुंचाया जा सके।

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