पिछले दशक में भले ही टेलीकॉम क्रांति से आमजन के हाथ मोबाइल पहुंच गया हो, मगर इसकी तकनीक के मामले में विकसित देश तो बहुत दूर, हम पड़ोसियों से भी पिछड़ गए हैं। देश में अभी 3जी सेवाएं पूरी तरह से चालू नहीं हो पाई हैं, वहीं चीन में इससे अगली पीढ़ी की तकनीक यानी 4जी को शुरू हुए करीब दो साल हो चुके हैं। पाकिस्तान 3जी और 4जी सेवा को एक साथ चालू करने की तैयारी में है। भारत में अभी 4जी को लेकर सुगबुगाहट ही शुरू हुई है। भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) जून में 4जी से संबंधित परामर्श पत्र जारी कर सकता है। ट्राई के चेयरमैन जेएस. सरमा ने बताया कि परामर्श पत्र में 4जी के लिए स्पेक्ट्रम आवंटन और सेवा प्रदाताओं को इसके लाइसेंस देने जैसे विभिन्न पहलुओं पर गौर किया जाएगा। हालांकि नियामक ने अगले साल तक इसके शुरू होने की उम्मीद जताई है। देश में सरकारी कंपनियां- बीएसएनएल और एमटीएनएल भले ही थ्री जी सेवा दे रही हों, लेकिन निजी टेलीकॉम ऑपरेटर अब तक इस सेवा को पूरी तरह से शुरू नहीं कर पाए हैं। बीते साल की दूसरी छमाही में ही भारतीय एयरटेल, वोडाफोन और टाटा टेलीसर्विसेज जैसी निजी कंपनियों को 3जी स्पेक्ट्रम मिला है। पिछले साल 3जी स्पेक्ट्रम की नीलामी से सरकार को 67 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का राजस्व प्राप्त हुआ था। सरमा के मुताबिक ट्राई जल्द ही 2जी स्पेक्ट्रम की कीमतें 3जी स्पेक्ट्रम से जोड़ने पर सरकार को नई सिफारिशें सौंपेगा।
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