भारत के सौवें अंतरिक्ष मिशन को शानदार सफलता
करार देते हुए प्रधानमंत्री मनमोहन
सिंह ने रविवार को कहा कि यह भारतीय अंतरिक्ष उद्योग की
वाणिज्यिक प्रतिस्पर्धा
की श्रेष्ठता का गवाह है। मिशन नियंतण्रकेंद्र से सिंह ने पीएसएलवी-सी21 को अपने साथ दो विदेशी उपग्रहों को लेकर
जाते देखा। उन्होंने कहा
‘इसरो
के सौवें मिशन के साथ ही आज का प्रक्षेपण हमारे देश की अंतरिक्ष क्षमताओं
के लिए मील का एक पत्थर है।’ सिंह
ने कहा ‘भारतीय
प्रक्षेपक वाहन से
इन उपग्रहों का प्रक्षेपण भारतीय अंतरिक्ष उद्योग की उत्कृष्टता का गवाह
है और यह देश के नवोन्मेष तथा कौशल को समर्पित है।’
उन्होंने फ्रांस के ईएडीएस एस्ट्रियम और जापान के
ओसाका इन्स्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी
को बधाई दी जिनके उपग्रह क्रमश: एसपीओटी 6 तथा प्रोइटेरेस को इसरो के पीएसएलवी
ने अपनी अपनी कक्षा में सफलतापूर्वक स्थापित किया। सिंह ने कहा ‘भारत को अपने अंतरिक्ष वैज्ञानिकों पर
गर्व है जिन्होंने वि स्तरीय उपकरण
बनाने तथा अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियां विकसित करने के लिए तमाम
विषमताओं का का
सामना कर उन पर जीत हासिल कर ली।’
गौरतलब है कि भारत इस साल अपने
अंतरिक्ष कार्यक्र म के 50 साल
भी पूरे कर रहा है। सिंह ने कहा कि
अक्सर सवाल पूछे जाते हैं कि क्या भारत जैसा गरीब देश अंतरिक्ष
कार्यक्र म का
खर्च वहन कर सकता है और क्या अंतरिक्ष अभियान पर खर्च हो रही राशि का अन्यत्र
बेहतर उपयोग हो सकता है। उन्होंने कहा ‘यहां
एक बिन्दु छूट जाता है कि
देश का विकास आखिरकार उसकी प्रौद्योगिकी आधारित कौशल का ही नतीजा है। हमारे
अंतरिक्ष कार्यक्र म की शुरूआत करने वालों के मन में भी यही भ्रम था लेकिन
वह अपनी कल्पना को हकीकत में बदलते रहे। जब हम विविध क्षेत्रों में मिले
व्यापक सामाजिक और राष्ट्रीय लाभों की ओर देखते हैं तो इसमें कोई शक नहीं
रह जाता कि वह (अंतरिक्ष कार्यक्र म के जनक) बिल्कुल सही थे।’
इसरो की सराहना करते हुए सिंह ने कहा कि
वह अंतरिक्ष के अनसुलझे रहस्य
सुलझाने की अपनी उत्सुकता के कारण हमेशा ही देश के लिए प्रेरणा
का एक सोत रहा
है।ाधानमंत्री ने 100 वें
मिशन से बेहद प्रसन्न वैज्ञानिकों से कहा
‘मैं कामना करता हूं कि आप इसी तरह बेहतर काम करते हुए विज्ञान
और प्रौद्योगिकी
की सीमाओं का विस्तार करें, समाज
को इसका लाभ दें और हमारे
महान देश के सामाजिक एवं आर्थिक विकास को गति दें।’ सफल मिशन के तत्काल बाद सिंह
ने वैज्ञानिकों को हाथ मिला कर बधाई दी।
राष्ट्रीय सहारा दिल्ली संस्करण पेज 13, 10-09-2012 lwpuk ,oa
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