अंतरिक्ष में 100वीं छलांग से गदगद इसरो के अध्यक्ष के राधाकृष्णन ने कहा कि चीन के साथ अंतरिक्ष युद्ध नहीं
छिड़ा है। इस क्षेत्र में
हमारी उससे कोई स्पर्धा नहीं है। इसरो प्रमुख के अनुसार, हमारा मंगल अभियान
महत्वपूर्ण जानकारियां हासिल करने को लेकर है। राधाकृष्णन पत्रकारों के सवालों का जवाब दे रहे थे। उनका कहना
था कि विज्ञान के
क्षेत्र में लगातार तकनीकी दक्षता हासिल करने के लिए तरह-तरह के प्रयोग किए जाते हैं। हम भी अंतरिक्ष में
अपनी संभावनाएं तलाश रहे हैं। उन्होंने बताया कि मंगल अभियान एक समयबद्ध कार्यक्रम है। यह नई तकनीक के विकास में सहायक होगा। इसरो प्रमुख के
अनुसार, हमने चंद्रयान-1 के दौरान हुई
तकनीकी दिक्कतों से हमने काफी सबक सीखा है। चंद्रयान-2 के लिए हम ऐसी तकनीक विकसित करना चाहते हैं, जिससे
किसी भी गड़बड़ी की स्थिति में उपग्रह उससे खुद ब खुद निपट ले। उन्होंने बताया कि चंद्रयान-2 भारत-रूस का साझा उपक्रम है। इसके लिए उपग्रह प्रक्षेपण यान जीएसएलवी को तैयार किया जा रहा है। राधाकृष्णन के मुताबिक, हम तो 2014 में इस अभियान के
लिए तैयार हैं। लेकिन कुछ देरी
रूस के तरफ से हो सकती है। क्योंकि रूस अपने अंतरिक्ष कार्यक्रम की समीक्षा कर रहा है।
दैनिक जागरण राष्ट्रीय संस्करण, पेज 5 ,
010-09-2012 lwpuk ,oa izkS|ksfxdh
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