ठ्ठ जागरण ब्यूरो, श्रीनगर पिछले
कुछ वर्षो में भारत विज्ञान और अनुसंधान के क्षेत्र में पिछड़ा है। यह
बात उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी ने सोमवार को कश्मीर विश्वविद्यालय में आठवीं
जम्मू-कश्मीर नेशनल साइंस कांग्रेस के उद्घाटन समारोह में कही। उन्होंने
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए विज्ञान को और ज्यादा
लोकप्रिय बनाने और युवा वैज्ञानिकों को प्रोत्साहित करने पर बल दिया।
साथ ही वैज्ञानिक खोजों व प्रौद्योगिकी को यथासंभव आम जीवन में लागू करने
के लिए जल्द ही देश में एक नई विज्ञान नीति बनाए जाने का संकेत दिया। उन्होंने
कहा कि शोधकर्ताओं को ज्यादा स्वायत्तता के साथ मतभेद की पर्याप्त स्वतंत्रता
वाली नई शोध संस्कृति को विकसित करने की जरूरत है। उन्होंने
कहा कि कुछ वर्षो में हमारा देश विज्ञान और अनुसंधान के क्षेत्र में
पिछड़ा है। हमारे जीडीपी का कुल 0.9 फीसद ही अनुसंधान और विकास पर खर्च किया
जा रहा था। हालांकि प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने यकीन दिलाया है कि
वह 12वीं
योजना के अंत तक इसे जीडीपी के दो प्रतिशत तक ले जाएंगे। विज्ञान
के प्रति आम लोगों को जागरूक बनाने, युवाओं में विज्ञान
के प्रति रुचि
पैदा करने के लिए हम तभी उन्हें प्रेरित कर सकते हैं, उनके
सामने रोल मॉडल
पेश कर सकते हैं, जब
हम अनुसंधान, शोध
और अध्यापन में रुकावटें दूर करें। इसके लिए जरूरी
है कि अंडर-ग्रेजुएट स्तर पर प्रसिद्ध रिसर्च स्कॉलर और
अध्यापक पढ़ाने के लिए आगे आएं। उन्होंने एक वैज्ञानिक का
उल्लेख करते हुए कहा कि सफल शोधकर्ता या वैज्ञानिक अपनी ही
धुन में सफलता की तरफ बढ़ता है। वर्तमान में हमारे सामने तीन
चुनौतियां हैं। विज्ञान में रुचि रखने वालों को बचपन में चिह्नित करना, उनका
संरक्षण व योग्य मार्गदर्शन करना और उनमें वैज्ञानिक प्रतिभा को विकसित
करते हुए उन्हें हमेशा ही इसी क्षेत्र से जुड़ रहने के लिए तैयार करना।
इससे हम शोधकर्ताओं और अध्यापकों की एक बेहतर पौध तैयार कर सकेंगे। उपराष्ट्रपति
ने कहा कि जम्मू-कश्मीर विज्ञान, प्रौद्योगिकी शिक्षा और अनुसंधान
के लिए आवश्यक अवसंरचना को लेकर कई दिक्कतों से जूझ रहा है। इनमें अधिकांश
मुश्किलों को स्थानीय युवाओं और नौजवान वैज्ञानिकों द्वारा केंद्र सरकार
द्वारा विज्ञान में रुचि और विकास के लिए संचालित योजनाओं को अपनाकर, दूर
किया जा सकता है। इसके अलावा जम्मू कश्मीर में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी
को लोकप्रिय बनाने के लिए समय समय पर घोषित किए जाने वाले पैकेजों
को सही तरीके से अमल में लाया जाना जरूरी है। यह व्यावहारिक ही नहीं
हमारी नैतिक जिम्मेदारी भी है। समारोह में
विश्वविद्यालय के कुलपति राज्यपाल एनएन वोहरा, प्रो. चांसलर मुख्यमंत्री
उमर अब्दुल्ला, उपकुलपति
प्रो. तलत अहमद और इंडियन नेशनल साइंस एकेडमी (इनसा) के
अध्यक्ष मौजूद थे। उपराष्ट्रपति ने इस अवसर पर विभिन्न क्षेत्रों
में अनुसंधान और खोज के लिए राज्य के दस युवा वैज्ञानिकों को भी
दैनिक जागरण राष्ट्रीय संस्करण पेज -4,18-9-2012
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