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Tuesday, September 18, 2012

विज्ञान-अनुसंधान में पिछड़ा भारत



ठ्ठ जागरण ब्यूरो, श्रीनगर पिछले कुछ वर्षो में भारत विज्ञान और अनुसंधान के क्षेत्र में पिछड़ा है। यह बात उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी ने सोमवार को कश्मीर विश्वविद्यालय में आठवीं जम्मू-कश्मीर नेशनल साइंस कांग्रेस के उद्घाटन समारोह में कही। उन्होंने कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए विज्ञान को और ज्यादा लोकप्रिय बनाने और युवा वैज्ञानिकों को प्रोत्साहित करने पर बल दिया। साथ ही वैज्ञानिक खोजों व प्रौद्योगिकी को यथासंभव आम जीवन में लागू करने के लिए जल्द ही देश में एक नई विज्ञान नीति बनाए जाने का संकेत दिया। उन्होंने कहा कि शोधकर्ताओं को ज्यादा स्वायत्तता के साथ मतभेद की पर्याप्त स्वतंत्रता वाली नई शोध संस्कृति को विकसित करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि कुछ वर्षो में हमारा देश विज्ञान और अनुसंधान के क्षेत्र में पिछड़ा है। हमारे जीडीपी का कुल 0.9 फीसद ही अनुसंधान और विकास पर खर्च किया जा रहा था। हालांकि प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने यकीन दिलाया है कि वह 12वीं योजना के अंत तक इसे जीडीपी के दो प्रतिशत तक ले जाएंगे। विज्ञान के प्रति आम लोगों को जागरूक बनाने, युवाओं में विज्ञान के प्रति रुचि पैदा करने के लिए हम तभी उन्हें प्रेरित कर सकते हैं, उनके सामने रोल मॉडल पेश कर सकते हैं, जब हम अनुसंधान, शोध और अध्यापन में रुकावटें दूर करें। इसके लिए जरूरी है कि अंडर-ग्रेजुएट स्तर पर प्रसिद्ध रिसर्च स्कॉलर और अध्यापक पढ़ाने के लिए आगे आएं। उन्होंने एक वैज्ञानिक का उल्लेख करते हुए कहा कि सफल शोधकर्ता या वैज्ञानिक अपनी ही धुन में सफलता की तरफ बढ़ता है। वर्तमान में हमारे सामने तीन चुनौतियां हैं। विज्ञान में रुचि रखने वालों को बचपन में चिह्नित करना, उनका संरक्षण व योग्य मार्गदर्शन करना और उनमें वैज्ञानिक प्रतिभा को विकसित करते हुए उन्हें हमेशा ही इसी क्षेत्र से जुड़ रहने के लिए तैयार करना। इससे हम शोधकर्ताओं और अध्यापकों की एक बेहतर पौध तैयार कर सकेंगे। उपराष्ट्रपति ने कहा कि जम्मू-कश्मीर विज्ञान, प्रौद्योगिकी शिक्षा और अनुसंधान के लिए आवश्यक अवसंरचना को लेकर कई दिक्कतों से जूझ रहा है। इनमें अधिकांश मुश्किलों को स्थानीय युवाओं और नौजवान वैज्ञानिकों द्वारा केंद्र सरकार द्वारा विज्ञान में रुचि और विकास के लिए संचालित योजनाओं को अपनाकर, दूर किया जा सकता है। इसके अलावा जम्मू कश्मीर में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी को लोकप्रिय बनाने के लिए समय समय पर घोषित किए जाने वाले पैकेजों को सही तरीके से अमल में लाया जाना जरूरी है। यह व्यावहारिक ही नहीं हमारी नैतिक जिम्मेदारी भी है। समारोह में विश्वविद्यालय के कुलपति राज्यपाल एनएन वोहरा, प्रो. चांसलर मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला, उपकुलपति प्रो. तलत अहमद और इंडियन नेशनल साइंस एकेडमी (इनसा) के अध्यक्ष मौजूद थे। उपराष्ट्रपति ने इस अवसर पर विभिन्न क्षेत्रों में अनुसंधान और खोज के लिए राज्य के दस युवा वैज्ञानिकों को भी

दैनिक जागरण राष्ट्रीय संस्करण पेज -4,18-9-2012 (lwpuk ,oa izkS|ksfxdh

Monday, September 10, 2012

सौवें अंतरिक्ष मिशन को पीएम ने कहा मील का पत्थर


भारत के सौवें अंतरिक्ष मिशन को शानदार सफलता करार देते हुए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने रविवार को कहा कि यह भारतीय अंतरिक्ष उद्योग की वाणिज्यिक प्रतिस्पर्धा की श्रेष्ठता का गवाह है। मिशन नियंतण्रकेंद्र से सिंह ने पीएसएलवी-सी21 को अपने साथ दो विदेशी उपग्रहों को लेकर जाते देखा। उन्होंने कहा इसरो के सौवें मिशन के साथ ही आज का प्रक्षेपण हमारे देश की अंतरिक्ष क्षमताओं के लिए मील का एक पत्थर है।सिंह ने कहा भारतीय प्रक्षेपक वाहन से इन उपग्रहों का प्रक्षेपण भारतीय अंतरिक्ष उद्योग की उत्कृष्टता का गवाह है और यह देश के नवोन्मेष तथा कौशल को समर्पित है।
उन्होंने फ्रांस के ईएडीएस एस्ट्रियम और जापान के ओसाका इन्स्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी को बधाई दी जिनके उपग्रह क्रमश: एसपीओटी 6 तथा प्रोइटेरेस को इसरो के पीएसएलवी ने अपनी अपनी कक्षा में सफलतापूर्वक स्थापित किया। सिंह ने कहाभारत को अपने अंतरिक्ष वैज्ञानिकों पर गर्व है जिन्होंने वि स्तरीय उपकरण बनाने तथा अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियां विकसित करने के लिए तमाम विषमताओं का का सामना कर उन पर जीत हासिल कर ली।
गौरतलब है कि भारत इस साल अपने अंतरिक्ष कार्यक्र म के 50 साल भी पूरे कर रहा है। सिंह ने कहा कि अक्सर सवाल पूछे जाते हैं कि क्या भारत जैसा गरीब देश अंतरिक्ष कार्यक्र म का खर्च वहन कर सकता है और क्या अंतरिक्ष अभियान पर खर्च हो रही राशि का अन्यत्र बेहतर उपयोग हो सकता है। उन्होंने कहा यहां एक बिन्दु छूट जाता है कि देश का विकास आखिरकार उसकी प्रौद्योगिकी आधारित कौशल का ही नतीजा है। हमारे अंतरिक्ष कार्यक्र म की शुरूआत करने वालों के मन में भी यही भ्रम था लेकिन वह अपनी कल्पना को हकीकत में बदलते रहे। जब हम विविध क्षेत्रों में मिले व्यापक सामाजिक और राष्ट्रीय लाभों की ओर देखते हैं तो इसमें कोई शक नहीं रह जाता कि वह (अंतरिक्ष कार्यक्र म के जनक) बिल्कुल सही थे।
इसरो की सराहना करते हुए सिंह ने कहा कि वह अंतरिक्ष के अनसुलझे रहस्य सुलझाने की अपनी उत्सुकता के कारण हमेशा ही देश के लिए प्रेरणा का एक सोत रहा है।ाधानमंत्री ने 100 वें मिशन से बेहद प्रसन्न वैज्ञानिकों से कहामैं कामना करता हूं कि आप इसी तरह बेहतर काम करते हुए विज्ञान और प्रौद्योगिकी की सीमाओं का विस्तार करें, समाज को इसका लाभ दें और हमारे महान देश के सामाजिक एवं आर्थिक विकास को गति दें।सफल मिशन के तत्काल बाद सिंह ने वैज्ञानिकों को हाथ मिला कर बधाई दी।
राष्ट्रीय सहारा दिल्ली  संस्करण पेज 13, 10-09-2012  lwpuk ,oa izkS|ksfxdh

अंतरिक्ष में भारत का शतक, पीएसएलवी-21 का सफल प्रक्षेपण



अपने साथ फ्रांस के उपग्रह एसपीओटी 6 और जापान के अंतरिक्ष यान प्रॉइटेरेस को लेकर रवाना हुआ पीएसएलवी-21 एजेंसी ने अब तक 62 उपग्रहों, एक स्पेस रिकवरी मॉड्यूल और 37 रॉकेटों को किया है सफलतापूर्वक प्रक्षेपित
श्रीहरिकोटा, आंध्रप्रदेश (एजेंसियां)। भारत ने रविवार को स्वदेशी पीएसएलवी-सी21 रॉकेट के प्रक्षेपण के साथ ही सौवें अंतरिक्ष मिशन का सफल कीर्तिमान अपने नाम कर लिया। इस राकेट ने दो विदेशी उपग्रहों को उनकी कक्षा में स्थापित किया। श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से जब पीएसएलवी-सी21 अपने साथ दो विदेशी उपग्रहों को लेकर रवाना हुआ तो प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह इस ऐतिहासिक सफलता को देखने के लिए वहां मौजूद थे। यह रॉकेट अपने साथ फ्रांस के उपग्रह एसपीओटी 6 को और जापान के अंतरिक्ष यान प्रॉइटेरेस (पीआरओआईटीईआरईएस) को लेकर रवाना हुआ और प्रक्षेपण के 18 मिनट बाद उन्हें उनकी कक्षा में स्थापित भी कर दिया। यह प्रक्षेपण सुबह नौ बज कर 51 मिनट पर किया जाना था लेकिन 51 घंटे की उल्टी गिनती पूरी होने के बाद उसमें दो मिनट का विलंब हो गया। पोलर सैटेलाइट लॉन्च वेहिकल (पीएसएलवी) सुबह नौ बज कर 53 मिनट पर तेज आवाज के साथ फ्रांसीसी उपग्रह को लेकर अपनी 22 वीं उड़ान पर रवाना हुआ। कुल 720 किलोग्राम वजन वाला यह फ्रांसीसी उपग्रह भारत द्वारा किसी विदेशी ग्राहक के लिए प्रक्षेपित सर्वाधिक वजन वाला उपग्रह है। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने इसे एक शानदार सफलता और मील का पत्थर करार दिया। सिलसिलेवार पूरी प्रक्षेपण प्रक्रि या को उत्सुकता से देख रहे सिंह ने दोनों उपग्रहों के कक्षाओं में स्थापित होने तक प्रत्येक चरण की सराहना की। यह प्रक्षेपण भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के लिए एक बड़ी उपलब्धि (शेष पेज 2)
यह मिशन देश की अंतरिक्ष क्षमताओं के लिए मील का पत्थर है, मैं इसकी शानदार सफलता के लिए वैज्ञानिकों को बधाई देता हूं - मनमोहन सिंह, प्रधानमंत्री , ,
राष्ट्रीय सहारा दिल्ली  संस्करण पेज 1, 10-09-2012  lwpuk ,oa izkS|ksfxdh