वैज्ञानिकों का दावा है कि उन्होंने एक ऐसी तकनीक ढूंढ निकाली है, जिसके इस्तेमाल से आपदाओं की स्थिति में भी मोबाइल फोन काम करेगा। इस तकनीक के जरिए उन इलाकों तक दूर स्थित टावरों से सिग्नल पहुंचाए जा सकेंगे, जहां के टावर काम नहीं कर रहे अथवा किसी आपदा के कारण ध्वस्त हो गए हों। फ्लिंडर्स यूनिवर्सिटी के एक अंतरराष्ट्रीय दल ने यह सॉफ्टवेयर तैयार किया है, जिससे मोबाइल टावर नहीं होने पर भी फोन किए जा सकेंगे। यह तकनीक निकटतम टावर से सिग्नलों को प्रभावित इलाके तक पहुंचाती है। इस शोध का नेतृत्व कर रहे डॉक्टर पॉल गार्डनर ने बताया कि बिना किसी अतिरिक्त हार्डवेयर के आम फोन भी इस सॉफ्टवेयर के जरिए बिना टावर के काम कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि हमारी यह तकनीक सभी के लिए है इसलिए कोई भी सेवा प्रदाता इसका इस्तेमाल कर सकता है। इस सॉफ्टवेयर के जरिए पिछड़े इलाकों में भी सिग्नल पहुंचाया जा सकेगा। हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया कि बाजार के उपभोक्ताओं तक यह तकनीक कब तक पहुंचाई जा सकेगी। उन्होंने जोड़ा कि वह और उनका दल इस तकनीक की संभावनाओं को लेकर बेहद उत्साहित है। इस तकनीक का इस्तेमाल करने वाले सेवा प्रदाताओं की सहायता करने में उन्हें बेहद खुशी होगी। इस तकनीक से उन ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में कमजोर सिग्नलों की समस्या से भी निजात मिल सकती है। वैज्ञानिकों ने कहा कि ऐसे इलाकों में मोबाइल का इस्तेमाल करने वाले लोग सिग्नलों को लेकर हमेशा परेशान रहते हैं। उन्होंने बताया कि परीक्षण के दौरान हमारे सॉफ्टवेयर वाले फोन ने वास्तव में बेहद कमजोर सिग्नल के बावजूद दूसरी जगह कॉल की।
Wednesday, February 2, 2011
अब आपदाओं की स्थिति में भी काम करेंगे मोबाइल
वैज्ञानिकों का दावा है कि उन्होंने एक ऐसी तकनीक ढूंढ निकाली है, जिसके इस्तेमाल से आपदाओं की स्थिति में भी मोबाइल फोन काम करेगा। इस तकनीक के जरिए उन इलाकों तक दूर स्थित टावरों से सिग्नल पहुंचाए जा सकेंगे, जहां के टावर काम नहीं कर रहे अथवा किसी आपदा के कारण ध्वस्त हो गए हों। फ्लिंडर्स यूनिवर्सिटी के एक अंतरराष्ट्रीय दल ने यह सॉफ्टवेयर तैयार किया है, जिससे मोबाइल टावर नहीं होने पर भी फोन किए जा सकेंगे। यह तकनीक निकटतम टावर से सिग्नलों को प्रभावित इलाके तक पहुंचाती है। इस शोध का नेतृत्व कर रहे डॉक्टर पॉल गार्डनर ने बताया कि बिना किसी अतिरिक्त हार्डवेयर के आम फोन भी इस सॉफ्टवेयर के जरिए बिना टावर के काम कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि हमारी यह तकनीक सभी के लिए है इसलिए कोई भी सेवा प्रदाता इसका इस्तेमाल कर सकता है। इस सॉफ्टवेयर के जरिए पिछड़े इलाकों में भी सिग्नल पहुंचाया जा सकेगा। हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया कि बाजार के उपभोक्ताओं तक यह तकनीक कब तक पहुंचाई जा सकेगी। उन्होंने जोड़ा कि वह और उनका दल इस तकनीक की संभावनाओं को लेकर बेहद उत्साहित है। इस तकनीक का इस्तेमाल करने वाले सेवा प्रदाताओं की सहायता करने में उन्हें बेहद खुशी होगी। इस तकनीक से उन ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में कमजोर सिग्नलों की समस्या से भी निजात मिल सकती है। वैज्ञानिकों ने कहा कि ऐसे इलाकों में मोबाइल का इस्तेमाल करने वाले लोग सिग्नलों को लेकर हमेशा परेशान रहते हैं। उन्होंने बताया कि परीक्षण के दौरान हमारे सॉफ्टवेयर वाले फोन ने वास्तव में बेहद कमजोर सिग्नल के बावजूद दूसरी जगह कॉल की।
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
No comments:
Post a Comment