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Thursday, February 10, 2011

महंगी हो सकती हैं कॉल दरें



ट्राई ने स्पेक्ट्रम की कीमतों में छह गुना बढ़ोतरी की सिफारिश की
टूजी स्पेक्ट्रम घोटाले के मामले में कैग की ओर से सौंपी गई रिपोर्ट के आधार पर दूरसंचार नियामक ट्राई ने ऑपरेटरों को दिए जाने वाले स्पेक्ट्रम की कीमतों में छह गुना बढ़ोत्तरी की सिफारिश की है। इससे मोबाइल सेवा महंगी हो सकती है। इससे पहले दूरसंचार मंत्री कपिल सिब्बल ने भी दूरसंचार नीति में बड़े बदलाव का ऐलान करते हुए कहा था कि सभी ऑपरेटरों को शुरुआती और अतिरिक्त स्पेक्ट्रम के लिए बाजार के मुताबिक कीमतें चुकानी होंगी।
भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) ने बुधवार को देश भर में सेवा के लिए 6.2 मेगाहर्ट्ज स्पेक्ट्रम के लिए लाइसेंस शुल्क 10,9725. 45 करोड़ रुपये रखने का सुझाव दिया। यह 1,658 करोड़ रुपये की मौजूदा दर से छह गुना ज्यादा है। अखिल भारतीय सेवा के लिए अगर ऑपरेटर 6.2 मेगाहर्ट्ज से ज्यादा स्पेक्ट्रम चाहते हैं तो उन्हें प्रत्येक मेगाहर्ट्ज के लिए एकमुश्त 4,571.87 करोड़ रुपये चुकाने होंगे। हालांकि एक से दूसरे सर्किल की दरों में अंतर होगा। ट्राई ने सुझाव दिया है कि संशोधित कीमतें 1 अप्रैल, 2010 से लागू होनी चाहिए। ट्राई ने यह भी कहा है कि कोई भी ऑपरेटर लाइसेंस नवीकरण के लिए आता है, तो उससे यही नई कीमत वसूल की जानी चाहिए। ज्यादातर ऑपरेटरों ने ट्राई की सिफारिश को दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया है। ट्राई की दर स्पेक्ट्रम आवंटन पर कैग की उस रिपोर्ट के अनुरूप है जिसके आधार पर 2007-08 में टूजी स्पेक्ट्रम के आवंटन में 1.76 लाख करोड़ रुपये की संभावित राजस्व हानि का अनुमान लगाया गया है

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