अब आप सिर्फ सोचिए और बाकी काम अपनी प्यारी कार पर छोड़ दें, वह आपको आराम से आपके गंतव्य तक पहुंचा देगी! विश्वास नहीं होता। वैज्ञानिकों ने कुछ ऐसे ही अकल्पनीय काम को साकार करने का दावा किया है। उदाहरण के तौर पर, आप केवल सोचें कि आज दफ्तर जाने के लिए आपकी कार को कौन सा रास्ता अपनाना चाहिए जो खुला मिले और आप मजे-मजे में उसी रास्ते से दफ्तर तक पहुंच जाएंगे। इसके लिए आपको जर्मनी के इंजीनियरों का धन्यवाद देना चाहिए जिन्होंने इस चमत्कार को अंजाम दिया है। उन्होंने ऐसी स्वचालित कार विकसित करने का दावा किया है जिसकी स्पीड और दिशा को ड्राइवर की सोच के जरिए तय किया जा सकता है। न्यू साइंटिस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, विकलांग लोग जो कार को नहीं चला सकते वह भी कम से कम कार की कुछ प्रणालियों को नियंत्रित कर सकेंगे। इस स्मार्ट, अर्ध-स्वचालित वॉक्सवैगन पासेट को मेडइनजर्मनी नाम दिया गया है। कार में लेसर रडार, माइक्रोवेव रडार और स्टीरियो कैमरा लगाए गए हैं। इनके जरिए कार 360 डिग्री पर अवरोधों की पहचान कर सकती है। इसके विकासकर्ताओं का कहना है कि यह 200 मीटर दूरी से ही सामने पड़ने वाले आघात को सूंघ कर बचाव कर सकती है। इस सब के बीच यह खुद से ही ड्राइविंग करने में सक्षम है या आइपैड और आइफोन की तरह रोचक कंट्रोल सिस्टमों के साथ जुड़ी रहती है। इसके परीक्षण के लिए बर्लिन की फ्री यूनिवर्सिटी के इंजीनियरों ने ड्राइवर को 16 इलेक्ट्रोइंसेफेलोग्राम (ईईजी) सेंसरों वाला माइंड कंट्रोल हेडसेट पहनाया। यह पूरी प्रणाली एक सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट किट के साथ जुड़ी रहती है जिससे ड्राइवरों के कुछ सुनिश्चित विचार दिमागी तरंगों के जरिए प्रणाली तक पहुंचते हैं। हालांकि ऐसे ईईजी सेंसर कई अन्य एप्लीकेशंस में इस्तेमाल किए जा चुके हैं, जैसे- कृत्रिम अंगों को नियंत्रित करने में, व्हीलचेयर पर लोगों को चलने में और यहां तक कि आइपैड को नियंत्रित करने में। बर्लिन के टेंफेलहॉफ हवाईअड्डे पर किए गए परीक्षणों में मस्तिष्क से नियंत्रित हो सकने वाली पासेट ने अच्छा प्रदर्शन किया। इसके निर्माताओं ने कहा कि हमारे परीक्षणों में दिखा है कि दिए गए निर्देश और कार की वास्तविक प्रतिक्रिया में जरा सा फर्क था। हालांकि यह सिर्फ एक प्रदर्शन था। गाड़ी किसी व्यस्त सड़क पर नहीं चल रही थी।
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