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Saturday, February 5, 2011

घुसपैठ की अनदेखी की थी भारत ने


विकीलीक्स ने किया एक और खुलासा पाक से बेहतर करना चाहते थे रिश्ते
भारत ने 2008 में पाकिस्तान के साथ अपने रिश्तों को मजबूत करने के लिए पड़ोसी देश से हो रहे घुसपैठ की भी अनदेखी कर दी थी। 2008 वही साल था जब पाकिस्तानी आतंकियों ने मुंबई आतंकी हमलों को अंजाम दिया। विकीलीक्स के खुलासे में एक खुफिया अमेरिकी संदेश का हवाला देते हुए बताया गया है कि 30 मई 2008 में भारत की यात्रा पर आए सीनेटरों रस फिनगोल्ड और बॉब कैजी को तत्कालीन राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार एमके नारायणन ने बताया कि पड़ोसी देश के साथ संबंध को बेहतर बनाने के प्रयास में भारत ने पाकिस्तान की नई सरकार से घुसपैठ के बढ़ते मामलों के प्रति विरोध प्रकट नहीं किया। नारायणन ने बताया कि 2004 से 2006 के बीच पाक के राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ के शासनकाल में समग्र वार्ता आगे बढ़ी और घुसपैठ में कमी आई। 2007 में पाकिस्तान में राजनीतिक संकट आने के बाद वार्ता ठहर गई। संदेश के मुताबिक, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार ने कहा कि उन्हें उम्मीदहै कि नया नेतृत्व जैसा मुशर्रफ ने किया वैसे नहीं कर रहा हैपर वह वार्ता को उपयोगी मानना जारी रखेगा। नारायणन ने कहा कि इस्लामाबाद में विदेश मंत्रियों की हालिया बैठक ने यह सुनिश्चित करने में मदद की कि नई सरकार समग्र वार्ता को जारी रखेगी। हालांकि तत्कालीन राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार ने घुसपैठ की बढ़ती घटनाओं पर अफसोस जताया था। एमके नारायणन ने कहा कि भारत सरकार ने घुसपैठ की अनदेखी की और कोई भी औपचारिक विरोध नहीं जताने का फैसला किया तथा इसे अस्थाई घटनामाना। विकीलीक्स के खुलासे में गोपनीय अमेरिकी संदेश में बताया गया कि नारायणन ने याद किया कि भारत और पाकिस्तान के बीच कटुता एक समय इस हद तक कम हो गई कि पाकिस्तान ने भारत सीमा से अपनी सेना को कम कर अफगानिस्तान सीमा से मिल रही चुनौतियों पर केंद्रित किया लेकिन वे ताकतें दोबारा भारतीय सीमा पर लौट आई हैं। सीनेटर कैजी ने पूछा कि पाक सेना और कबायली संगठनों के बीच हुए समझौते पर भारत कैसा महसूस करता है तो नारायणन ने जवाब दिया कि भारत सरकार उन्हें शांति के लिए उपयुक्त नहीं मानती। उन्होंने कहा कि वे आतंक आउट सोर्स कर रहे हैं। नारायणन ने रेखांकित किया कि अमेरिका इस पहलू को समझता है लेकिन ब्रिटेन का मानना है कि शांति समझौता बेहतर कदम है।

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