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Wednesday, February 23, 2011

सिर्फ सोचिए और जहां चाहे ले जाइये अपनी कार!


अब आप सिर्फ सोचिए और बाकी काम अपनी प्यारी कार पर छोड़ दें, वह आपको आराम से आपके गंतव्य तक पहुंचा देगी! विश्वास नहीं होता। वैज्ञानिकों ने कुछ ऐसे ही अकल्पनीय काम को साकार करने का दावा किया है। उदाहरण के तौर पर, आप केवल सोचें कि आज दफ्तर जाने के लिए आपकी कार को कौन सा रास्ता अपनाना चाहिए जो खुला मिले और आप मजे-मजे में उसी रास्ते से दफ्तर तक पहुंच जाएंगे। इसके लिए आपको जर्मनी के इंजीनियरों का धन्यवाद देना चाहिए जिन्होंने इस चमत्कार को अंजाम दिया है। उन्होंने ऐसी स्वचालित कार विकसित करने का दावा किया है जिसकी स्पीड और दिशा को ड्राइवर की सोच के जरिए तय किया जा सकता है। न्यू साइंटिस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, विकलांग लोग जो कार को नहीं चला सकते वह भी कम से कम कार की कुछ प्रणालियों को नियंत्रित कर सकेंगे। इस स्मार्ट, अर्ध-स्वचालित वॉक्सवैगन पासेट को मेडइनजर्मनी नाम दिया गया है। कार में लेसर रडार, माइक्रोवेव रडार और स्टीरियो कैमरा लगाए गए हैं। इनके जरिए कार 360 डिग्री पर अवरोधों की पहचान कर सकती है। इसके विकासकर्ताओं का कहना है कि यह 200 मीटर दूरी से ही सामने पड़ने वाले आघात को सूंघ कर बचाव कर सकती है। इस सब के बीच यह खुद से ही ड्राइविंग करने में सक्षम है या आइपैड और आइफोन की तरह रोचक कंट्रोल सिस्टमों के साथ जुड़ी रहती है। इसके परीक्षण के लिए बर्लिन की फ्री यूनिवर्सिटी के इंजीनियरों ने ड्राइवर को 16 इलेक्ट्रोइंसेफेलोग्राम (ईईजी) सेंसरों वाला माइंड कंट्रोल हेडसेट पहनाया। यह पूरी प्रणाली एक सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट किट के साथ जुड़ी रहती है जिससे ड्राइवरों के कुछ सुनिश्चित विचार दिमागी तरंगों के जरिए प्रणाली तक पहुंचते हैं। हालांकि ऐसे ईईजी सेंसर कई अन्य एप्लीकेशंस में इस्तेमाल किए जा चुके हैं, जैसे- कृत्रिम अंगों को नियंत्रित करने में, व्हीलचेयर पर लोगों को चलने में और यहां तक कि आइपैड को नियंत्रित करने में। बर्लिन के टेंफेलहॉफ हवाईअड्डे पर किए गए परीक्षणों में मस्तिष्क से नियंत्रित हो सकने वाली पासेट ने अच्छा प्रदर्शन किया। इसके निर्माताओं ने कहा कि हमारे परीक्षणों में दिखा है कि दिए गए निर्देश और कार की वास्तविक प्रतिक्रिया में जरा सा फर्क था। हालांकि यह सिर्फ एक प्रदर्शन था। गाड़ी किसी व्यस्त सड़क पर नहीं चल रही थी।


Friday, February 11, 2011

छात्रों के लिए वर्चुअल लैब


इस दिशा में 150 लै ब का नेटवर्क तैयार किया गया है प्रत्येक लैब में 10 प्रयोग किए जा सकते हैं
मोबाइल पर दोस्तों से बात करते, फेसबुक व ट्वीटर पर चैटिंग करते समय लोग अक्सर ऐसी दुनिया में चले जाते हैं जहां दूर रहते हुए भी एक-दूसरे का हालचाल जाना सकता है। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी), आईआईएससी के वैज्ञानिकों ने प्रयोग की दिशा में ऐसे ही एक वर्चुअल (आभासी) संसार का सृजन किया है जिसके माध्यम से छात्र, प्रोफेसर एवं अन्य लोग इंजीनियरिंग एवं प्रौद्योगिकी प्रयोग कर सकते हैं। मानव संसाधन विकास मंत्रालय में संयुक्त सचिव एन के सिन्हा ने मीडिया से कहा, ‘इस दिशा में 150 वर्चुअल लैब का नेटवर्क तैयार किया गया है और प्रत्येक लैब में 10 प्रयोग किये जा सकते हैं । इस पर 80 करोड़ रुपए का खर्च आया है और इसके विस्तार तक 200 करोड़ रुपए खर्च हो सकते हैं।वर्चुअल लैब पर कुछ प्रयोग मुफ्त किए जा सकते हैं। हालांकि सिन्हा ने बताया, ‘कुछ खर्चीले और कठिन प्रयोग के लिए प्रयोगकर्ताओं को स्थान चुनने के लिए भुगतान करना होगा । कुछ उच्चस्तरीय प्रयोगों के लिए उपयोगकर्ताओं को जांच परीक्षा देने को कहा जा सकता है ताकि उनके पहल की गंभीरता का पता चल सके।
इंजीनियरिंग और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में इन वर्चुअल लैब में पाठ्य सामग्री, साफ्टवेयर और आंकड़े मौजूद होंगे और इसके माध्यम से दक्षतापूर्ण तरीके से प्रयोगों को अंजाम दिया जा सकता है। इस प्रयोगशाला में छात्रों का मार्गदर्शन करने के लिए प्राध्यापक उपलब्ध रहेंगे। यह पहल मानव संसाधन विकास मंत्रालय के सौजन्य से शुरू की गई है और इस दिशा में शिक्षा मिशन के तहत आभासी विश्वविद्यालयस्थापित करने की दिशा में भी काम किया जा रहा है।

Thursday, February 10, 2011

महंगी हो सकती हैं कॉल दरें



ट्राई ने स्पेक्ट्रम की कीमतों में छह गुना बढ़ोतरी की सिफारिश की
टूजी स्पेक्ट्रम घोटाले के मामले में कैग की ओर से सौंपी गई रिपोर्ट के आधार पर दूरसंचार नियामक ट्राई ने ऑपरेटरों को दिए जाने वाले स्पेक्ट्रम की कीमतों में छह गुना बढ़ोत्तरी की सिफारिश की है। इससे मोबाइल सेवा महंगी हो सकती है। इससे पहले दूरसंचार मंत्री कपिल सिब्बल ने भी दूरसंचार नीति में बड़े बदलाव का ऐलान करते हुए कहा था कि सभी ऑपरेटरों को शुरुआती और अतिरिक्त स्पेक्ट्रम के लिए बाजार के मुताबिक कीमतें चुकानी होंगी।
भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) ने बुधवार को देश भर में सेवा के लिए 6.2 मेगाहर्ट्ज स्पेक्ट्रम के लिए लाइसेंस शुल्क 10,9725. 45 करोड़ रुपये रखने का सुझाव दिया। यह 1,658 करोड़ रुपये की मौजूदा दर से छह गुना ज्यादा है। अखिल भारतीय सेवा के लिए अगर ऑपरेटर 6.2 मेगाहर्ट्ज से ज्यादा स्पेक्ट्रम चाहते हैं तो उन्हें प्रत्येक मेगाहर्ट्ज के लिए एकमुश्त 4,571.87 करोड़ रुपये चुकाने होंगे। हालांकि एक से दूसरे सर्किल की दरों में अंतर होगा। ट्राई ने सुझाव दिया है कि संशोधित कीमतें 1 अप्रैल, 2010 से लागू होनी चाहिए। ट्राई ने यह भी कहा है कि कोई भी ऑपरेटर लाइसेंस नवीकरण के लिए आता है, तो उससे यही नई कीमत वसूल की जानी चाहिए। ज्यादातर ऑपरेटरों ने ट्राई की सिफारिश को दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया है। ट्राई की दर स्पेक्ट्रम आवंटन पर कैग की उस रिपोर्ट के अनुरूप है जिसके आधार पर 2007-08 में टूजी स्पेक्ट्रम के आवंटन में 1.76 लाख करोड़ रुपये की संभावित राजस्व हानि का अनुमान लगाया गया है

अब मोबाइल पर इंजीनियरिंग की पढ़ाई


अब आप अपने मोबाइल से भी इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर सकेंगे। बशर्ते आपके मोबाइल में इंटरनेट की सुविधा होनी चाहिए। गूगल, अमेजन जैसी विश्वस्तरीय खोजी वेबसाइट से मुकाबला करते हुए भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, मद्रास (आइआइटी-एम) ने एक राष्ट्रीय स्तर का सर्वर तैयार किया है जिस पर अपलोड की गई शैक्षणिक सामग्रियों को मोबाइल फोन से भी डाउनलोड किया जा सकता है। राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी उन्नयन शिक्षा कार्यक्रम (एनपीटेल) के तहत मानव संसाधान विकास मंत्रालय ने छात्रों की सुविधा के लिए वेब और वीडियो प्रारूप में इंजीनियरिंग, प्रबंधन और विज्ञान के स्नातकोत्तर कोर्स पेश किए हैं। इस पर समाजिक विज्ञान के स्नातकोत्तर कोर्स से जुड़ी सामग्री भी रखी गई है। आइआइटी-एम के निदेशक एम.एस. अनंत ने इस राष्ट्रीय सर्वर को अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रौद्योगिकी क्षमता वाला बताया और कहा कि इस पर वेब और वीडियो प्रारूप में पठन सामग्री रखी गई है। वेब प्रारूप में 125 कोर्स और वीडियो प्रारूप में 135 कोर्स पेश किए गए हैं। प्रत्येक कोर्स में विभिन्न आइआइटी और आइआइएससी के बेहतरीन शिक्षकों के करीब 40 घंटे के लेक्चर रखे गए हैं। मानव संसाधान विकास मंत्री कपिल सिब्बल ने इस बारे में कहा कि यह एक शानदार उपलब्धि है जिसके माध्यम से शिक्षा को एक नया आयाम मिला है। अब हमें यह सुनिश्चित करना है कि यह ज्ञानव‌र्द्धक के साथ मनोरंजक भी हो। इस दिशा में यह माध्यम मुक्त शिक्षा प्रदान करने में काफी मददगार होगा। इस योजना का प्रस्ताव साल 1999 में पेश किया गया था। इस कार्यक्रम के पहले चरण के माध्यम से बुनियादी इंजीनियरिंग के 16 वेब और 20 वीडियो कोर्स के साथ कंप्यूटर, इलेक्ट्रॉनिक्स, सिविल, मैकेनिकल इंजीनियरिंग के 125 वेब और 131 वीडियो कोर्स पेश किए जा रहे हैं। प्रो. अनंत ने बताया कि इस कार्यक्रम के दूसरे चरण के तहत स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर पर करीब 1,000 कोर्स प्रस्तावित हैं। ये कोर्स प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग, प्रबंधन, विज्ञान और मानविकी के क्षेत्र में पेश किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि दूसरा चरण साल 2012 तक पूरा हो जाने की उम्मीद है। इस कार्यक्रम के तहत विभिन्न क्षेत्रों के उत्कृष्ठ शिक्षकों के लेक्चरों को पाठ्यक्रम के अनुरूप अपलोड किया गया है और कंप्यूटर के एक क्लिक से छात्र के समक्ष पूरा विषय पेश हो जाएगा। यू-ट्यूब की तरह इन विषयों से जुड़े वीडियो सर्वर पर रखे गए हैं। विश्वविद्यालयों, कॉलेजों और शैक्षणिक संस्थाओं को हार्ड डिस्क उपलब्ध कराई गई हैं और इसे बीएसएनएन नेटवर्क की मदद से डाउनलोड किया जा सकता है। अनंत ने कहा कि इस कार्यक्रम का दूसरा चरण पूरा हो जाने के बाद इस पर 20 हजार घंटे की सामग्री मौजूद होगी जो संभवत: शैक्षणिक माध्यम में दुनिया का सबसे बड़ा संग्राहक होगा। इस कार्यक्रम के तहत देश में मौजूद उत्कृष्ठ शिक्षकों को ऑनलाइन माध्यम से इससे जोड़ा जा रहा है ताकि शिक्षकों की कमी को सूचना संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) माध्यम से दूर की जा सके।

Saturday, February 5, 2011

घर बैठे आवेदन करें, फीस ई-पेमेंट से जमा कराएं


राजधानी में शुक्रवार से ऑनलाइन ड्राइविंग लाइसेंस बनाने की प्रणाली शुरू गई। मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने पहला डीएल अपना बनवाया। उन्होंने आनलाइन आवेदन किया। डीएल की फीस भी इंटरनेट (ई-पेमेंट) के जरिए जमा हुई। कुछ ही देर में नवीनीकरण के साथ डीएल मिल गया। इस प्रणाली के उद्घाटन के साथ ही मुख्यमंत्री ने कहा कि दिल्लीवासी घर बैठे डीएल के लिए आवेदन कर सकते हैं। इसके लिए उन्हें क्षेत्रीय प्राधिकरणों में धक्के नहीं खाने पड़ेंगे। लोग सुविधा एवं स्थान के अनुसार नजदीक में पड़ने वाले प्राधिकरण में ड्राइविंग लाइसेंस बनवा सकते हैं। ये जरूरी नहीं कि लर्निग लाइसेंस कहां से बनवाया था। इसके साथ ही दिल्ली की सभी 13 क्षेत्रीय प्राधिकरण आपस में जुड़ गए हैं। मुख्यमंत्री ने डीएल दिखाते हुए कहा कि उन्होंने जब पहली बार डीएल बनवाया था, तब और अब में बहुत बड़ा फर्क है। आज सिस्टम इतना आधुनिक हो चुका है कि सबकुछ आसान हो गया है। सीएम ने कबूल किया पहली बार जब उन्होंने डीएल बनवाया था तो कानून तोड़ा था, क्योंकितब वह 12 वर्ष की थीं। डीएल के लिए परीक्षा खुद दी थी और बाकी चीजें नियम कानून से पूरी की थीं। बाद में रिन्यू होता चला गया। परिवहन मंत्री अरविंदर सिंह लवली, परिवहन आयुक्त आरके वर्मा, डीटीसी के चेयरमैन नरेश कुमार आदि मौजूद रहे। इस नई व्यवस्था से ड्राइविंग लाइसेंस पाने के लिए अभ्यर्थी देश या विदेश के किसी भी शहर से आनलाइन आवेदन कर सकते हैं। इसकी फीस भी ई-पेमेंट के जरिये कर सकते हैं, लेकिन डीएल टेस्ट (परीक्षा) के लिए उपस्थित होना पड़ेगा। इसके अलावा सुविधा के अनुसार समय (दिन और तारीख) एवं जगह (अथारिटी) भी पहले से बुक करवा सकते हैं। इसके लिए काल सेंटर (9311900800)की मदद लेनी होगी। काल सेंटर में समय (अपाइमेंट) बुक कराने वाले अभ्यर्थी का ही ड्राइविंग लाइसेंस बनाया जाएगा। एक महीने तक ट्रायल के तौर पर इसकी छूट रहेगी। सुबह 9 बजे से शाम 5.30 बजे तक देश एवं दुनिया में बैठे दिल्लीवासी काल सेंटर में फोन कर सुविधा के अनुसार समय बुक करवा सकते हैं। अभ्यर्थी को सुबह 8.30 बजे से 10.30 बजे तक का समय फिक्स रखा जाएगा। कश्मीरी गेट आइएसबीटी बिल्डिंग में बने काल सेंटर को पांच लाइनों से कनेक्ट किया गया है, ताकि लोगों को परेशानी न हो। इसकी शुरुआत आज इंद्रप्रस्थ स्थित नई दिल्ली परिवहन प्राधिकरण से हुई है.

घुसपैठ की अनदेखी की थी भारत ने


विकीलीक्स ने किया एक और खुलासा पाक से बेहतर करना चाहते थे रिश्ते
भारत ने 2008 में पाकिस्तान के साथ अपने रिश्तों को मजबूत करने के लिए पड़ोसी देश से हो रहे घुसपैठ की भी अनदेखी कर दी थी। 2008 वही साल था जब पाकिस्तानी आतंकियों ने मुंबई आतंकी हमलों को अंजाम दिया। विकीलीक्स के खुलासे में एक खुफिया अमेरिकी संदेश का हवाला देते हुए बताया गया है कि 30 मई 2008 में भारत की यात्रा पर आए सीनेटरों रस फिनगोल्ड और बॉब कैजी को तत्कालीन राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार एमके नारायणन ने बताया कि पड़ोसी देश के साथ संबंध को बेहतर बनाने के प्रयास में भारत ने पाकिस्तान की नई सरकार से घुसपैठ के बढ़ते मामलों के प्रति विरोध प्रकट नहीं किया। नारायणन ने बताया कि 2004 से 2006 के बीच पाक के राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ के शासनकाल में समग्र वार्ता आगे बढ़ी और घुसपैठ में कमी आई। 2007 में पाकिस्तान में राजनीतिक संकट आने के बाद वार्ता ठहर गई। संदेश के मुताबिक, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार ने कहा कि उन्हें उम्मीदहै कि नया नेतृत्व जैसा मुशर्रफ ने किया वैसे नहीं कर रहा हैपर वह वार्ता को उपयोगी मानना जारी रखेगा। नारायणन ने कहा कि इस्लामाबाद में विदेश मंत्रियों की हालिया बैठक ने यह सुनिश्चित करने में मदद की कि नई सरकार समग्र वार्ता को जारी रखेगी। हालांकि तत्कालीन राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार ने घुसपैठ की बढ़ती घटनाओं पर अफसोस जताया था। एमके नारायणन ने कहा कि भारत सरकार ने घुसपैठ की अनदेखी की और कोई भी औपचारिक विरोध नहीं जताने का फैसला किया तथा इसे अस्थाई घटनामाना। विकीलीक्स के खुलासे में गोपनीय अमेरिकी संदेश में बताया गया कि नारायणन ने याद किया कि भारत और पाकिस्तान के बीच कटुता एक समय इस हद तक कम हो गई कि पाकिस्तान ने भारत सीमा से अपनी सेना को कम कर अफगानिस्तान सीमा से मिल रही चुनौतियों पर केंद्रित किया लेकिन वे ताकतें दोबारा भारतीय सीमा पर लौट आई हैं। सीनेटर कैजी ने पूछा कि पाक सेना और कबायली संगठनों के बीच हुए समझौते पर भारत कैसा महसूस करता है तो नारायणन ने जवाब दिया कि भारत सरकार उन्हें शांति के लिए उपयुक्त नहीं मानती। उन्होंने कहा कि वे आतंक आउट सोर्स कर रहे हैं। नारायणन ने रेखांकित किया कि अमेरिका इस पहलू को समझता है लेकिन ब्रिटेन का मानना है कि शांति समझौता बेहतर कदम है।

Friday, February 4, 2011

परमाणु हमले की तैयारी में अलकायदा


विकीलीक्स ने किया खुलासा अमेरिका के विभिन्न शहरों में 9/11 की तरह कर सकता है हमले परमाणु विस्फोटों के भंडारण और वैज्ञानिकों की भर्ती में जुटा
लंदन (एजेंसी)। अलकायदा एक बार फिर किसी घातक हमले की तैयारी में है । विकीलीक्स द्वारा जारी ताजा अमेरिकी राजनयिक केबल्स में खुलासा किया गया की अलकायदा विनाशकारी
परमाणु विस्फोटकों के भंडारण और अनैतिकदु ष्ट वैज्ञानिकों की भर्ती में जुटा है । इस तरह वह विश्व के महत्त्वपूर्ण शहरों पर 9/11 की तरह के आतंकी हमले करने की साजिश रच रहा है। द टेलीग्राफ ने लीक हुए दस्तावेजों के हवाले से अपनी रिपोर्ट में बताया है कि अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के डिप्टी डायरेक्टर जनरल,टोमीहीरो टानिगुची ने अमेरिका को चेतावनी दी है कि विश्व परमाणु 9/11’ के खतरे के साये में है अगर यूरेनियम और प्लूटोनियम के भंडारों को आतंकवादियों से सुरक्षित नहीं रखा जाता है। लेकिन इस बीच आस्ट्रिया की राजधानी विएना स्थित आईएईए के मुख्यालय का अप्रैल 2008 में दौरा करने वाले राजनयिकों ने कहा है कि ऐसा कोई तरीका नहीं है जिनसे अपनी प्रयोगशाला कीपरिधि को सुरक्षादी जा सके क्योंकि उसमें ऐसे रास्ते है जो किसी घुसपैठ के सामने अभेद्य नहीं है। जनवरी 2009 में एक नाटो की बैठक में सुरक्षा प्रमुखों ने सदस्य देशों को कहा कि अल कायदा घातक रेडियोधर्मी आईईडी यानि कामचलाऊ परमाणु बम की साजिश रच रहा है जोकि अफगानिस्तान में ब्रिटिश सैनिकों के खिलाफ इस्तेमाल किये जा सकते हैं। जेट विमानों को उड़ाने के लिएटेडी बियरका इस्तेमाल: विकीलीक्स द्वारा जारी किए गए केबल्स में ये खुलासा किया गया है कि बच्चों के पसंदीदा खिलौने टेडी बियर का उपयोग विमान में बम ले जाने के लिए आतंकी कर सकते हैं। द टेलीग्राफ के मुताबिक,अमेरिकी खुफिया एजेंसी ने हवाई अड्डों के सुरक्षा कर्मचारियों को हिदायत दी है कि बच्चों के सामान को संदिग्ध विस्फोटकों के लिए जांच करते रहें। इस खतरे के बारे में अमेरिकी सुरक्षा सचिव जैनेट नैपोलिटैनो और यूरोपीय मंत्रियों के बीच जनवरी 2010 को स्पेन में हुई बैठक में बताया गया था। जर्मनी के गृहमंत्री थॉमस डी मेजियर ने इस संभावना का उल्लेख किया था कि बच्चों के सामान का उपयोग आतंकवादी हवाई जहाज में बम ले जाने के लिए कर सकते हैं।

Thursday, February 3, 2011

हवाई जहाज से तेज दौड़ेगी ट्रेन


विश्व में सबसे तेजी से उभरते देश चीन ने एक और मील का पत्थर पीछे छोड़ दिया है। उसने ऐसी ट्रेन विकसित कर ली है जिसकी रफ्तार हवाई जहाज से भी तेज होगी। दक्षिण चीन की एक प्रयोगशाला में इस तकनीक को विकसित किया गया है। हालांकि अभी इस तकनीक को व्यवहारिक रूप से चीन में लागू करने में काफी वक्त लग सकता है। जियाओतोंग यूनिवर्सिटी की ट्रैक्शन पावर स्टेट प्रयोगशाला में इस शोध को अंजाम दिया गया है। यूनिवर्सिटी के वाइस डीन शुआई बिन ने बताया कि वैक्यूम मैग्नेटिक सस्पेंशन ट्रेन मॉडल 600 से 1200 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार पकड़ने में कामयाब रहा। यह गति हवाई जहाज के बराबर है। उन्होंने उम्मीद जताई कि दस साल के भीतर इस तकनीक का व्यवहारिक प्रयोग शुरू हो जाएगा और 2030 तक ऐसी ट्रेन चीन के कई हिस्सों में दौड़ती नजर आएगी। इसके जरिए यात्री बीजिंग से गुवांग्जू का सफर मात्र दो घंटे में तय कर सकेंगे। जबकि प्लेन के जरिए इस दूरी को तय करने में तीन घंटे का समय लगता है। शुआई ने कहा कि हालांकि अभी इस तकनीक का इस्तेमाल छोटे स्तर पर किया गया है। उन्होंने कहा कि अभी यह सिर्फ प्रयोगात्मक सफलता है। इसका वास्तविक मोल काफी कम है क्योंकि व्यवहारिक रूप से इसे अपनाए जाने के बीच अभी काफी बड़ी खाई है। इस तकनीक पर फिलहाल अमेरिका और स्विटजरलैंड भी शोध कर रहे हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार, सैद्धांतिक रूप से वैक्यूम ट्यूब में दौड़ने वाली ट्रेन 20 हजार किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार पकड़ सकती है। इसके अन्य भी कई फायदे हैं। पहला यह कि हवाई जहाज में लगने वाले ईधन का दसवां हिस्सा ही ट्रेन के लिए पर्याप्त होगा। साथ ही इसमें ना के बराबर आवाज होगी। शुआई ने यह भी कहा कि देश में वैक्यूम ट्यूब वाली नई यातायाता प्रणाली खड़ी होने से पहले ये सभी फायदे बस एक गुब्बारे के समान हैं और यह बेहद खर्चीली भी होगी। उन्होंने जोड़ा कि सामान्य सब-वे के मुकाबले एक किलोमीटर वैक्यूम ट्यूब का खर्च कई गुना ज्यादा आएगा। उन्होंने कहा कि फिलहाल इस तकनीक का सिर्फ प्रयोगात्मक महत्व है और जबरदस्त खर्चीली होने के कारण अभी यह वहन योग्य नहीं है।