भविष्य की विमान यात्रा दुर्लभ और हैरतअंगेज नजारों से भरपूर ही नहीं बल्कि एडवेंचर स्पोर्ट्स के शौकीनों के लिए यह बहुत ही सहज और सुलभ सफर होगा। 2050 तक उपलब्ध होने वाले यात्री विमान पारदर्शी होंगे। इससे उनकी बनावट कमजोर नहीं होगी बल्कि इस डिजाइन से वह विमान का ही नहीं बल्कि आसमान और धरती के खूबसूरत दृश्यों से रूबरू हो सकेंगे। ब्रिटिश कंपनी एयरबस ने अगले चालीस सालों में हवाई सफर की एक नई अवधारणा रच ली है। भविष्य के यह विमान सिर्फ बाहरी डिजाइन से ही नहीं बल्कि आंतरिक व्यवस्था और साज-सज्जा में भी क्रांतिकारी परिवर्तन लेकर आएंगे। इन विमानों में बिजनेस और इकॉनमी क्लास नहीं होंगे बल्कि इनकी जगह आराम करने के जोन लेंगे जो विमान के अगले हिस्से में होंगे। विमान के सामने और किनारे का अंदर-बाहर का पूरा दृश्य विमान के पारदर्शी होने के कारण बे-रोकटोक देखा जा सकेगा। कामकाज के लिए विमान के पिछले इलाके में एक अलग जोन बनाया जाएगा। इसके अलावा, मित्रों और बिजनेस एसोसिएट्स के साथ चर्चा-परिचर्चा के लिए विभिन्न प्रकार के पेयों से भरपूर बार भी होगा। विमान के अंदर की दीवारें रोशनी की जरूरत के मुताबिक बदल जाएंगी। केबिन की दीवारों की झिल्ली कमरे के तापमान को भी नियंत्रित करेगी। यही झिल्ली जरूरत पड़ने पर विमान को पारदर्शी भी बना देगी। ताकि यात्री बाहर का नजारा ले सकें। होलोग्राफिक तकनीक से गेम्स खेले जा सकेंगे। वर्चुअल गोल्फ से लेकर कई आउटडोर गेम भी संभव होंगे। यात्रियों के शरीर के तापमान से मिली ऊर्जा से मनोरंजक कार्यक्रम दिखाए जाएंगे। आरामदेह सीटें और अन्य तकनीकें तो फिर भी अस्तित्व में आई हैं लेकिन पर्यावरण के अनुकूल विमान की बॉडी को पारदर्शी बनाना और उसकी मजबूती को भी बरकरार रखने के लिए किस धातु का इस्तेमाल होगा यह अभी तक उजागर नहीं किया गया है। विमान के केबिनों में विटामिन और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर हवा होगी। यात्रियों को मानसिक और शारीरिक आराम देने के लिए विमान में अरोमा थेरेपी, एक्यूप्रेशर आदि का भी इंतजाम रहेगा। इंटरएक्टिव जोन में बातचीत करने और लोगों से संपर्क करने का पूरा इंतजाम होगा। एयरबस की इस भावी लक्जरी सेवा पर कंपनी के इंजीनियरिंग एक्जिक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट चार्ल्स चैंपियन का कहना है कि उनकी रीसर्च के मुताबिक 2050 में यात्री बिंदास सफर करना चाहेंगे। वह पर्यावरण का भरपूर ख्याल रखते हुए उसका भरपूर अनुभव भी करेंगे। एयरबस के इस विमान को बनाने पर लंदन के ग्रीनविच में स्थित प्रयोगशाला में काम चल रहा है।
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