साझा इस्तेमाल वाले कियोस्क (टच स्क्रीन पण्राली वाला बूथ) और वेब तथा मोबाइल से चेक-इन करने की पण्राली जैसी नई विमानन प्रौद्योगिकियों से हवाई यात्रा आसान और उपभोक्ताओं के अनुकूल हो जाएगी। इस तरह की प्रौद्योगिकियों को देश के हवाई अड्डा परिचालनकर्ता और विमानन कंपनियां तेजी से अपना रही हैं। निकट भविष्य में जब आप दिल्ली हवाई अड्डे के टर्मिनल-3 पर महज हैंडबेग के साथ जाएंगे तो आप विमानन कंपनी के काउंटर पर चेक-इन किए बिना सीधे सुरक्षा द्वार में प्रवेश कर विमान में चढ़ सकेंगे। आपको महज अपना ई-टिकट या बोर्डिंग पास दिखाना होगा जिसे आप अपने घर या दफ्तर में बैठ कर विमानन कंपनी की वेबसाइट से हासिल कर सकेंगे। टिकट या बोर्डिंग पास को महज हवाई अड्डे के प्रवेश द्वार पर लगे कियोस्क पर दिखाना होगा। वैश्विक विमानन प्रौद्योगिकी कंपनी एआरआईएनसी के प्रबंध निदेशक (एशिया प्रशांत) जिम मार्टिन ने यहां बताया कि यह सब नई प्रौद्योगिकी 'वेरीपेक्स' के जरिये संभव हो सकेगा जिसका अभी टी-3 पर परीक्षण किया जा रहा है। इस कंपनी का मुख्यालय अमेरिका के एनापोलिस में है। कंपनी टी-3 पर यात्री चेक-इन और सामान संदेश पण्राली के 550 उपकरण पहले ही स्थापित कर चुकी है। विमानन कंपनी के काउंटर और दफ्तरों को ये नई पण्रालियां देने के साथ ही कंपनी ने 90 हैंड-हेल्ड स्केनर भी टी-3 पर लगाए हैं। इस तरह यह पण्राली प्रति घंटे 12,800 नग सामान की जांच कर सकती है। सुरक्षा बढ़ाने के लिए एआरआईएनसी ने टी-3 पर अपनी नई वेरीपेक्स एसएम सेवा शुरू की है जो भारत के किसी भी हवाई अड्डे पर पहली बार अपनाई जा रही है। बोर्डिंग पास की वैधता जांचने और सुरक्षित क्षेत्र में फर्जी यात्रियों का प्रवेश रोकने के लिए सुरक्षा एजेंसियां वेरीपेक्स का इस्तेमाल करती हैं। नई प्रौद्योगिकियों का इस्तेमाल करते हुए एयर इंडिया और जेट एयरवेज ने 'मोबाइल चेक-इन' सेवा शुरू की है जिनसे यात्री मोबाइल फोन के जरिये चेक- इन कर सकते हैं। जेट ने यह सेवा अपने फ्रीक्वेंट फ्लायर्स के लिए शुरू की है और इसे जल्द ही विस्तार दिया जाएगा। मोबाइल फोन पर बार कोड वाले बोर्डिंग पास के इस्तेमाल के बारे में पूछे जाने पर मार्टिन ने कहा-''हम इस प्रौद्योगिकी को भारत में लाने के बेहद करीब हैं। हम कई सारी भारतीय विमानन कंपनियों के साथ काम कर रहे हैं।''
Monday, April 18, 2011
नई प्रौद्योगिकी से आसान होगी हवाई यात्रा
साझा इस्तेमाल वाले कियोस्क (टच स्क्रीन पण्राली वाला बूथ) और वेब तथा मोबाइल से चेक-इन करने की पण्राली जैसी नई विमानन प्रौद्योगिकियों से हवाई यात्रा आसान और उपभोक्ताओं के अनुकूल हो जाएगी। इस तरह की प्रौद्योगिकियों को देश के हवाई अड्डा परिचालनकर्ता और विमानन कंपनियां तेजी से अपना रही हैं। निकट भविष्य में जब आप दिल्ली हवाई अड्डे के टर्मिनल-3 पर महज हैंडबेग के साथ जाएंगे तो आप विमानन कंपनी के काउंटर पर चेक-इन किए बिना सीधे सुरक्षा द्वार में प्रवेश कर विमान में चढ़ सकेंगे। आपको महज अपना ई-टिकट या बोर्डिंग पास दिखाना होगा जिसे आप अपने घर या दफ्तर में बैठ कर विमानन कंपनी की वेबसाइट से हासिल कर सकेंगे। टिकट या बोर्डिंग पास को महज हवाई अड्डे के प्रवेश द्वार पर लगे कियोस्क पर दिखाना होगा। वैश्विक विमानन प्रौद्योगिकी कंपनी एआरआईएनसी के प्रबंध निदेशक (एशिया प्रशांत) जिम मार्टिन ने यहां बताया कि यह सब नई प्रौद्योगिकी 'वेरीपेक्स' के जरिये संभव हो सकेगा जिसका अभी टी-3 पर परीक्षण किया जा रहा है। इस कंपनी का मुख्यालय अमेरिका के एनापोलिस में है। कंपनी टी-3 पर यात्री चेक-इन और सामान संदेश पण्राली के 550 उपकरण पहले ही स्थापित कर चुकी है। विमानन कंपनी के काउंटर और दफ्तरों को ये नई पण्रालियां देने के साथ ही कंपनी ने 90 हैंड-हेल्ड स्केनर भी टी-3 पर लगाए हैं। इस तरह यह पण्राली प्रति घंटे 12,800 नग सामान की जांच कर सकती है। सुरक्षा बढ़ाने के लिए एआरआईएनसी ने टी-3 पर अपनी नई वेरीपेक्स एसएम सेवा शुरू की है जो भारत के किसी भी हवाई अड्डे पर पहली बार अपनाई जा रही है। बोर्डिंग पास की वैधता जांचने और सुरक्षित क्षेत्र में फर्जी यात्रियों का प्रवेश रोकने के लिए सुरक्षा एजेंसियां वेरीपेक्स का इस्तेमाल करती हैं। नई प्रौद्योगिकियों का इस्तेमाल करते हुए एयर इंडिया और जेट एयरवेज ने 'मोबाइल चेक-इन' सेवा शुरू की है जिनसे यात्री मोबाइल फोन के जरिये चेक- इन कर सकते हैं। जेट ने यह सेवा अपने फ्रीक्वेंट फ्लायर्स के लिए शुरू की है और इसे जल्द ही विस्तार दिया जाएगा। मोबाइल फोन पर बार कोड वाले बोर्डिंग पास के इस्तेमाल के बारे में पूछे जाने पर मार्टिन ने कहा-''हम इस प्रौद्योगिकी को भारत में लाने के बेहद करीब हैं। हम कई सारी भारतीय विमानन कंपनियों के साथ काम कर रहे हैं।''
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