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Tuesday, April 12, 2011

सिर्फ दस साल के लिए कंपनियों को मिलेंगे लाइसेंस, नई दूरसंचार नीति में होगा प्रावधान


स्पेक्ट्रम आवंटन में गड़बड़ी पर मौजूदा विवादों के बीच केंद्र सरकार ने टेलीकॉम कंपनियों के लिए आवंटित लाइसेंस फीस की अवधि को मौजूदा 20 वर्ष से घटा कर 10 वर्ष करने की योजना बनाई है। इस वर्ष के अंत तक घोषित होने वाली राष्ट्रीय टेलीकॉम नीति-2011 में इस बारे में विस्तार से प्रावधान किए जाएंगे। साथ ही सरकार ने यह भी कहा है कि जिन कंपनियों को अपने लाइसेंस का नवीकरण करवाना होगा उन्हें लाइसेंस समाप्त होने से ढाई वर्ष पहले इस बारे में आवेदन करना होगा। संचार व सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री कपिल सिब्बल ने सोमवार को संवाददाता सम्मेलन में बताया कि मौजूदा दूरसंचार कंपनियों के लाइसेंस अब 10 वर्षो के लिए ही बढ़ाए जाएंगे। इसके लिए कंपनियों को लाइसेंस खत्म होने की अवधि से 30 महीने पहले आवेदन करना होगा, ताकि सरकार को फैसला लेने के लिए पर्याप्त समय मिले। नई दूरसंचार नीति-2011 के तहत सरकार दूरसंचार क्षेत्र में विलय व अधिग्रहण के मौजूदा नियमों को भी उदार बनाएगी। हालांकि इस बात का ख्याल रखा जाएगा कि किसी भी सर्किल में सरकारी कंपनी बीएसएनएल सहित टेलीकॉम कंपनियों की संख्या छह से कम न हो। संचार मंत्री की यह घोषणा आने वाले दिनों में देश में संचार सुविधाओं को महंगा कर सकती है। कंपनियों को लाइसेंस और स्पेक्ट्रम के लिए अलग-अलग फीस देनी होगी। यह फीस बाजार मूल्य के आधार पर तय होगी। यानी कंपनियों की लागत बढ़ेगी और उन्हें इसकी भरपाई अब सिर्फ 10 वर्षो में करनी होगी। जानकारों का मानना है कि सरकार अगर यह कदम उठाती है तो इसका फायदा उन टेलीकॉम कंपनियों को ज्यादा होगा जिन्होंने वर्ष 2007-08 में विवादों में घिरे पूर्व संचार मंत्री ए. राजा से स्पेक्ट्रम हासिल किए थे। इन कंपनियों को वर्ष 2028 तक के लिए लाइसेंस मिले हैं। एयरटेल, वोडाफोन जैसी पुरानी कंपनियों पर नई नीति जल्दी लागू होगी। इन कंपनियों के लाइसेंस अगले कुछ वर्षो के भीतर खत्म होने हैं। जाहिर है कि इन्हें नए लाइसेंस लेने के लिए ज्यादा कीमत देनी होगी। सिब्बल का संकेत साफ था कि लाइसेंस नवीकरण की फीस दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) के प्रस्ताव के मुताबिक तय होगी। ट्राई ने कुछ महीने पहले ही स्पेक्ट्रम की कीमत मौजूदा दर से छह गुणा ज्यादा वसूलने का प्रस्ताव किया है। बहरहाल, सिब्बल ने भविष्य में स्पेक्ट्रम से संबंधित हर तरह के फैसले नए राष्ट्रीय कानून के तहत करने का आश्वासन दिया। इसके लिए एक राष्ट्रीय स्पेक्ट्रम कानून बनाया जाएगा। इसका मसौदा तैयार करने के लिए सेवानिवृत्त न्यायाधीश शिवराज बी. पाटिल की अध्यक्षता में एक समिति गठित की गई है। साथ ही सरकार टेलीकॉम कंपनियों के पास उपलब्ध स्पेक्ट्रम की ऑडिटिंग बाहरी एजेंसी से करवाने की व्यवस्था भी कर रही है|

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