बेंगलूर, प्रेट्र : ट्रांसपोंडरों की भारी मांग
पर भारत ने पांच सालों में यानी 2017 तक 14 संचार उपग्रह
प्रक्षेपित करने की तैयारी की है। अंतरिक्ष विभाग के अनुसार
12वीं
पंचवर्षीय योजना (2012-2017)
में देश में 794 ट्रांस्पोंडरों की
जरूरत पड़ेगी। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) इसे पूरा करने में जुटा
है। इस
वर्ष मार्च के अंत तक इनसैट और जीसैट उपग्रहों के जरिए जो ट्रांसपोंडर काम
कर रहे हैं उनकी कुल संख्या 187 है। इन 14 प्रस्तावित उपग्रहों
में मोबाइल
संचार के लिए उच्च शक्ति वाले एस-बैंड सैटेलाइट और नई पीढ़ी के जियो-इमेंजिंग
सैटेलाइट (भू-बिंब उपग्रह) शामिल रहेंगे। इसका मकसद ट्रांसपोंडरों
की क्षमता बढ़ाने और नई पीढ़ी के ब्रॉड बैंड वीसैट और केए बैंड
प्रणालियों की शुरुआत करना है। ये उपग्रह देश की सभी जरूरतों को पूरी करने
के लिए ट्रांसपोंडरों की मांग और आपूर्ति की खाई पाटने का काम करेंगे। इसके
अलावा आकस्मिक जरूरतों के लिए पर्याप्त ट्रांसपोंडर खाली भी रहेंगे। अंतरिक्ष
विभाग के शोध एवं विकास विंग इसरो के सूत्रों ने यह जानकारी दी। बारहवीं
पंचवर्षीय योजना में पीएसएलवी के 16 और जीएसएलवी एमके-टू
के छह और जीएसएलवी
एमके-थ्री के दो अभियानों की योजना है। इसरो के बेंगलूर स्थित मुख्यालय
के अनुसार, बारहवीं
पंचवर्षीय योजना में कुल 58 अभियानों
की योजना बनाई
गई है। इनमें से 33 सैटेलाइट
मिशन और 25 लांच
वेहिकल मिशन हैं। इसके अलावा, पीएसएलवी और जीएसएलवी
के संदेशों की मदद से राडार अंतरिक्ष में उपग्रह के कचरे से
भारतीय सैटेलाइटों को बचाए रखने का भी काम करेगा। योजना आयोग
ने इस पंचवर्षीय योजना में अंतरिक्ष विभाग के कार्यक्रम मद में 47500 करोड़
रुपये आवंटन की संस्तुति की है। गैर योजना मद का बजट मिलाकर यह करीब 55 हजार
करोड़ रुपये हो जाएगा।
Dainik Jagran
National Edition 7-10-2012 lwpuk ,oa
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