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Wednesday, May 18, 2011

पाकिस्तान ने अमेरिका को बढ़ा चढ़ाकर दिए सेना के बिल


अफगानिस्तान में अमेरिकी सेना को पाकिस्तान द्वारा दी जा रही सुविधाओं के भुगतान के लिए अमेरिका को सौंपे गए बिल की राशियां पाकिस्तान ने गलत और बढ़ा- चढ़ा कर पेश की हैं। उसकी इस नापाक हरकत के चलते ओसामा बिन लादेन प्रकरण के बाद दोनों देशों के संबंधों में आई कड़वाहट कम होने की बजाए और बढ़ेगी। अमेरिकी अखबार वॉल स्ट्रीट जर्नल ने स्वीडिश वेबसाइट विकिलीक्स द्वारा हासिल किए अमेरिका के खुफिया केबलों के आधार पर तैयार की अपनी रिपोर्ट में यह दावा किया है। इन केबलों के अनुसार, पाकिस्तान साल 2006 से ऐसे फर्जी बिल अमेरिका को दे रहा है, मगर अमेरिकी अधिकारी इनमें से अधिकांश को अस्वीकार कर देते हैं। अखबार की रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिका ने पाकिस्तानी अधिकारियों द्वारा भेजे गए बिलों का 40 फीसदी भाग मंजूर नहीं किया है। बिल के इस हिस्से में सेना के खाने-पीने और रहन-सहन के खर्च का हिसाब दिया गया था। हालांकि इस संबंध में अभी अमेरिकी रक्षा विभाग पेंटागन ने कोई टिप्पणी नहीं की है। अखबार ने दस्तावेजों और अमेरिकी अधिकारियों से बातचीत के आधार पर लिखा है कि पाकिस्तान अक्सर ऐसे गलत हिसाब-किताब वाले बिल अमेरिका को भेजता रहता है। इन बिलों में कई बार तो ऐसी चीजों का भी उल्लेख रहता है जिनका युद्ध के मैदान से कुछ लेना-देना नहीं होता। इससे पाकिस्तान के प्रति अविश्र्वास और बढ़ेगा। उदाहरण के तौर पर पाकिस्तानी सेना ने जनवरी 2009 से जून 2010 के बीच साफ-सफाई के संसाधनों और रसायनों में खर्च के लिए पांच करोड़ डॉलर (करीब 2.2 अरब रुपये) का बिल दिया था, लेकिन अमेरिका ने इसके लिए केवल आठ लाख डॉलर (करीब 36 करोड़ रुपये) ही मंजूर किए। 2009 में पाकिस्तान की सबसे बड़ी सैन्य इकाई ज्वाइंट स्टाफ ने सेना की खाद्य सामग्री, चिकित्सा सुविधा और वाहनों के रखरखाव के लिए पांच लाख, 80 हजार डॉलर (करीब 2.6 करोड़ रुपये) मांगे थे, लेकिन अमेरिका ने कोई भुगतान नहीं किया। 

Saturday, May 7, 2011

अब कंप्यूटर को मोड़ कर रख सकेंगे जेब में


अगर सब कुछ ठीक रहा तो आने वाले समय में कार्यालयों में आज की तरह कंप्यूटर और फोन रखने की जरूरत नहीं पड़ेगी। कनाडा के वैज्ञानिकों ने विशेष मैटीरियल से बना ऐसा स्मार्ट कंप्यूटर बनाया है, जो क्रेडिट कार्ड की तरह पतला और लचीला है। इसे पेपरफोन नाम दिया गया है। इसकी खासियत यह है कि जगह के अनुरूप उसमें फिट हो जाता है। यह नई तकनीक कंप्यूटर जगत में क्रांति ला देगी। प्रमुख शोधकर्ता रॉयल वर्टिगाल के मुताबिक 9.5 सेमी का यह स्मार्ट कंप्यूटर भविष्य में पतले हैंडसेट और कंप्यूटर की दुनिया में क्रांति लाएगा। इसमें यूजर्स को कंप्यूटर और मोबाइल फोन दोनों की सुविधाएं मिलेगी। इससे कॉल करने, संगीत बजाने, गूगल के मानचित्र को बड़ा करने, ई-बुक को पढ़ने के लिए स्क्रीन को टच करने या बटन को दबाने की जरूरत नहीं है। बल्कि इसके कमांड कोनों को मोड़ने और आगे-पीछे करने से नियंत्रित होंगे। अलग-अलग दिशा में मोड़ने के अलग कमांड होंगे। अपने लचीलेपन के कारण मौजूदा उपकरणों की तुलना में इसका रखरखाव में आसान होगा। यह आपकी जेब में भी आसानी से आ जाएगा। किंग्सटन में क्वींस यूनिवर्सिटी में ह्यूमन मीडिया लैब के निर्देशक वर्टिगाल ने कहा, यही भविष्य है। आने वाले पांच वर्षो में सब कुछ ऐसे ही बदल जाएगा। यह कंप्यूटर कागज की पतली शीट की तरह होगा। इस पर पेन से लिखा भी जा सकता है। इसके इस्तेमाल से भविष्य में कार्यालय में कंप्यूटर, कागज या प्रिंटर की जरूरत नहीं होगी। उन्होंने बताया कि इस पेपर कंप्यूटर के इस्तेमाल से कागजों की बचत होगी। एक तरह से यह पेपरलेस ऑफिस की कल्पना को पूरा कर सकता है। इसमें हर चीज डिजिटल रूप में संग्रहित रहेगी। नई जनरेशन का यह कंप्यूटर बेहद हल्का और पतला होगा जिसे आसानी से कहीं भी ले जाया जा सकता है। विशेषज्ञों ने एक ऐसा कंप्यूटर भी विकसित किया है, जिसे अपनी कलाई में बंाधा जा सकता है और उसे कलाई से हटाने पर नोटपैड की तरह उपयोग किया जा सकता है। इसे गेम चेंजिंग टेक्नोलॉजी नाम दिया गया है। इस तरह के तकनीकी बदलाव को बाजार में आने में पांच से दस साल लगेंगे। यह कंप्यूटर 10 मई को वैंकूवर में प्रदर्शित किया जाएगा।


Tuesday, May 3, 2011

इसरो ने बनाया सबसे तेज सुपर कम्प्यूटर


इसरो ने बनाया देश का सबसे तेज सुपर कंप्यूटर


भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने देश का सबस तेज सुपरकंप्यूटर बनाने में कामयाबी हासिल की है। इस सुपरकंप्यूटर का नाम सागा-220 दिया गया है। तिरुवनंतपुरम के व्रिकम साराभाई स्पेस सेंटर (वीएसएससी) में सतीश धवन सुपरकंप्यूटिंग फेसिलिटी द्वारा इसे तैयार किया गया है। इसके निर्माण पर करीब 14 करोड़ रुपये का खर्च आया है। संगठन के वक्तव्य के अनुसार, इसरो अध्यक्ष के. राधाकृष्णन ने इसका उद्घाटन किया। नई ग्राफिक प्रोसेसिंग यूनिट (जीपीयू) आधारित सागा-220 (सुपरकंप्यूटर फॉर एयरोस्पेस विद जीपीयू आर्किटेक्चर 220 टेराफ्लॉप्स) का इस्तेमाल अंतरिक्ष वैज्ञानिक जटिल अंतरिक्षीय समस्याओं को सुलझाने में कर रहे हैं। सागा-220 को का डिजाइन और निर्माण पूरी तरह विक्रम साराभाई स्पेस सेंटर द्वारा किया गया है। लागत, ऊर्जा और जगह के हिसाब से देखा जाए तो मौजूदा जीपीयू सिस्टम पारंपरिक सीपीयू आधारित सिस्टम के मुकाबले कही ज्यादा फायदेमंद होता है। यह सिस्टम जहां प्रदूषण रहित है वहीं, सिर्फ 150 किलोवाट ऊर्जा की खपत करता है।